
जैसलमेर. सोनार दुर्ग में श्वानों को पकडऩे की कवायद हुई तेज। पत्रिका
जैसलमेर. पर्यटननगरी में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या अब जन सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। शहर की मुख्य सडक़ों से लेकर मोहल्लों, बाजारों और पर्यटन स्थलों तक श्वानों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं। कई इलाकों में स्थिति ऐसी हो गई है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए अकेले घर से निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। सुबह और शाम के समय श्वानों के झुंड अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले लोगों और स्कूल जाने वाले बच्चों में भय का माहौल बना हुआ है। शहरवासियों का कहना है कि कई बार श्वान अचानक राहगीरों के पीछे दौड़ पड़ते हैं या वाहनों के सामने आ जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। रात के समय सुनसान सडक़ों पर इनका आतंक और अधिक बढ़ जाता है। कई क्षेत्रों में लोग बच्चों को अकेले बाहर खेलने भेजने से भी कतरा रहे हैं।
आवारा श्वानों के हमलों और काटने की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। राजकीय अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 5 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि महीने में औसतन करीब 150 लोगों को श्वान काट रहे हैं। जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन के साथ सीरम भी उपलब्ध है। हाल ही में विभिन्न मोहल्लों और सोनार दुर्ग क्षेत्र में बच्चों समेत कई लोगों को श्वानों द्वारा काटे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। चिकित्सकों के अनुसार श्वान के काटने के बाद समय पर उपचार और एंटी रैबीज टीकाकरण आवश्यक होता है, लेकिन लगातार बढ़ रही घटनाएं चिंता का विषय हैं।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में खुले कचरे के ढेर और भोजन की उपलब्धता के कारण श्वानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
- नगरपरिषद की ओर से पिछले लम्बे अर्से से श्वानों की नसबंदी का कार्यक्रम नहीं चलाए जाने से भी उनकी संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई।
- एक अनुमान के अनुसार जैसलमेर शहरी क्षेत्र में आवारा श्वानों की संख्या करीब 3000 तक पहुंच गई है।
- कई स्थानों पर श्वान झुंड बनाकर क्षेत्र विशेष पर कब्जा कर लेते हैं और वहां आने-जाने वालों पर आक्रामक व्यवहार करते हैं। इससे आमजन के साथ-साथ पर्यटकों में भी असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
आवारा श्वानों की समस्या को लेकर नगरपरिषद की ओर से समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं दे रहा। हाल के दिनों में कुछ श्वानों को पकडऩे की कार्रवाई जरूर की गई, लेकिन शहरवासियों का कहना है कि केवल चंद श्वानों को पकडकऱ जिम्मेदारों ने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। शहर के अधिकांश इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में आवारा श्वान खुले घूम रहे हैं। जानकारों के अनुसार समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक स्तर पर श्वानों की गणना, नसबंदी अभियान, टीकाकरण और पुनर्वास जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। साथ ही कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत कर भोजन के खुले स्रोतों को नियंत्रित करना भी जरूरी है। फिलहाल शहर के अनेक हिस्सों में हालात ऐसे हैं कि लोग हर गली और हर सडक़ पर श्वानों के झुंड देखकर सतर्क रहने को मजबूर हैं।
पिछले महीनों के दौरान श्वानों की नसबंदी का कार्य तेज गर्मी के कारण बंद था, लेकिन अब यह कार्य करने वाली टीम फील्ड में सक्रिय हो गई है। वर्तमान में जहां से भी शिकायत मिलती है, टीम पहुंच कर नियमानुसार कार्रवाई कर रही है।
- लजपाल सिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर
Published on:
22 Jun 2026 08:53 pm
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