
फसल कटाई के सीजन में रामदेवरा प्रवासी मजदूरों का केंद्र बन गया है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों और राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों मजदूर यहां पहुंच चुके हैं। किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है, ऐसे में वे मजदूरों को मुंहमांगे दाम देने को मजबूर हैं। क्षेत्र में इन दिनों सरसों, चना, इसबगोल और जीरा जैसी फसलों की कटाई चल रही है। मौसम के बदलते मिजाज से नुकसान की आशंका के चलते किसान जल्दी से जल्दी कटाई करवाना चाहते हैं, लेकिन मजदूरों की कमी उनके लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। मजदूरों को न केवल 500 रुपए तक की मजदूरी दी जा रही है, बल्कि भोजन, किराया और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उज्जैन से आए रामस्वरूप बताते हैं कि हमारे गांव में अधिकतम 350 रुपए मजदूरी मिलती है, लेकिन यहां न केवल ज्यादा पैसा मिलता है, बल्कि खाने-रहने और आने-जाने की सुविधा भी दी जाती है। इसी कारण हम 60-70 लोगों के साथ यहां पहुंचे हैं और दो महीने तक यहीं रहेंगे।
रामदेवरा में हर बस और ट्रेन में मजदूरों की भीड़ देखी जा रही है। खेतों में काम के लिए किसान और ठेकेदार पहले से मजदूरों का इंतजार करते मिलते हैं। यहां हर साल 20 से 25 हजार प्रवासी मजदूर आते हैं, जो आसपास के 100 किमी के दायरे में मजदूरी करने जाते हैं।
फसल कटाई का कार्य मशीनों से भी किया जा सकता है, लेकिन अधिकतर किसान अभी भी परंपरागत तरीके को ही प्राथमिकता देते हैं। मजदूरों की मांग बढऩे से किसानों को अतिरिक्त सुविधाएं देनी पड़ रही हैं। मजदूरों को खेतों तक लाने-ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। फसल कटाई का यह सिलसिला आगामी दो महीनों तक जारी रहेगा। किसानों की निर्भरता प्रवासी मजदूरों पर लगातार बढ़ रही है।
Published on:
07 Mar 2025 11:40 pm
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