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राजस्थान चुनाव 2018: दुनिया में भारत का मान बढ़ाने वाला राजस्थान का ये गांव दशकों बाद भी जूझ रहा ऐसे हालात से

Rajasthan Election 2018: पोकरण ने देश को तो महाशक्ति बनाया, ...लेकिन हमारे गांव को मिला कैंसर-अपंगता...
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जैसलमेर

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Dinesh Saini

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Updated: 29 Nov 2018, 10:15 AM IST

Pokharan

- शैलेंद्र पांडेय और के.आर. मुंडियार
पोकरण। वर्ष 1974 और 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद जैसलमेर जिले का पोकरण क्षेत्र देश-दुनिया में सुर्खियों में आ गया। इस चुनावी दौर में पोकरण की नब्ज जानने पत्रिका टीम सीधे खेतोलाई पहुंची, जहां पर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने मई 1998 में दो दिन में पांच परमाणु परीक्षण किए थे। रातों-रात खेतोलाई गांव भी दुनिया भर में चर्चित हो गया। लोगों की उम्मीदें भी जगी कि अब तो विकास होगा।

लेकिन खेतोलाई बीस साल में ज्यादा नहीं बदला। स्थानीय निवासी राजाराम ने बताया कि न अच्छी सडक़ें हैं और न पेयजल के पर्याप्त इंतजाम। यहां टैंकरों से पेयजल व्यवस्था करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अकाल जैसे हालात में पशुधन बचाने के लिए चारे-पानी का इंतजाम भी मुश्किल है।

सेवानिवृत शिक्षक मांगीलाल विश्नोई बताते हैँ कि परमाणु परीक्षण के कारण खेतोलाई गांव के नाम से हर किसी को गर्व होता है। लेकिन इसने गांव को कैंसर, खुजली जैसी बीमारियां भी दी हैं, इससे मौतें हो रही हैं, मवेशी भी रेडिएशन से अपंग, अंधेपन के शिकार हो रहे हैं। उनके मुताबिक बीमार गायों के दूध से बीमारी इंसानों तक पहुंच रही हैं।


हालांकि अभी तक ऐसी कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है कि जिससे यहां रेडिएशन की पुष्टि हो। लेकिन इन दशकों में यहां कैंसर के मरीज बढऩे से ग्रामीण रेडिएशन को ही वजह मान रहे हैं। ऐसे हालातों के बीच चुनावी दौर जोरों पर है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ क्षेत्र में सभाएं कर चुके हैं।


कनेक्टिविटी की परेशानी
जैसलमेर-बीकानेर-जयपुर एक्सप्रेस, रानीखेत एक्सप्रेस, हावड़ा एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें पोकरण रेलवे स्टेशन नहीं आकर बाइपास ही गुजर जाती है। ऐसे में पोकरण शहर कनेक्टिविटी से कट रहा है। रेलवे स्टेशन को बचाने एवं ट्रेनों को पोकरण स्टेशन लाने के लिए जनता ने कई बार आंदोलन भी किए, लेकिन नेताओं ने ट्रेनों के ठहराव के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किए।

काश्तकारों की समस्या
इस क्षेत्र की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि व पशुपालन पर टिका है। लेकिन यहां कृषि उपज मंडी नहीं है। ऐसे में काश्तकारों को जोधपुर मंडी एवं फलोदी मंडी जाकर अपना अनाज बेचना पड़ रहा है। वहीं बीमार पशुओं के इलाज के लिए ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाएं नहीं हैं। पोकरण शहर के पशु चिकित्सालय में भी पर्याप्त सुविधा व स्टाफ नहीं है।


पोकरण शहर के हालात भी अच्छे नहीं
शहर में सडक़-नालियों के हालात अच्छे नहीं हैं। सीवरेज तंत्र बिगड़ा हुआ है। अस्थाई अतिक्रमण, आवारा पशु एवं बेलगाम यातायात भी बड़ी परेशानी है। दोनों महाविद्यालय (गल्र्स व बॉयज) में 15 व्याख्याताओं व दोनों प्राचार्यों के पद रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्र की स्कूली शिक्षा ढांचे में भी सुधार की दरकार है।

विकिरण से हो रहा कैंसर, सरकार मुफ्त दे इलाज
पोकरण में परमाणु परीक्षणों के गवाह रहे मांगीलाल ने बताया कि पहले विस्फोट के बाद आसपास के गांवों में खुजली जैसी बीमारियां फैल गई थीं। दूसरे परमाणु परीक्षण में सावधानी बरती गई और इसका प्रत्यक्ष असर कम हुआ। आज भी यहां गायों के बछड़े-बछिया जो पैदा होते हैं उनके कान और दिल के पास अजीब सा काला धब्बा होता है। विकिरण का असर ऐसा है कि आस पास के गांवों में करीब 50 से ज्यादा लोग कैंसर से पीडि़त हैं। वे दूर के भाई साजनराम से मिलवाते हैं, जिन्हें मुंह के कैंसर की शिकायत है। साथ ही कहते हैं यहां चुनावी मौसम में भी कोई बड़ा नेता सुध लेने नहीं आया। सरकार को हमारे लिए कम से कम इतना तो करना चाहिए कि कैंसर रोगियों को मुफ्त इलाज हो।

अस्पताल बन गया, शुरू नहीं हुआ
करीब तीन हजार की आबादी वाले गांव में चिकित्सा सुविधा नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का नया भवन तो बना दिया, लेकिन शुरू नहीं हो पाया है। युवा पंकज विश्नोई ने कहा कि चुनाव में नेता चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने व पेयजल आपूर्ति के आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में कोई पलटकर नहीं देखता। पोकरण शहर के सीएचसी में चिकित्सकों के 25 में से 10 पद रिक्त हैं। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों व घायलों को 175 किलोमीटर दूर जोधपुर संभाग के अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।

रेडिएशन सर्वे नहीं, वर्षों बीते
मांगीलाल का दावा है कि 20 साल में खेतोलाई में 15 लोगों की मौत रेडिएशन के कारण कैंसर व हृदय रोग से हो चुकी है। कई बार अर्जी के बाद भी प्रशासन ने गांव में रेडिएशन का सर्वे नहीं कराया। सेवानिवृत्त फौजी साजनराम के मुंह में कैंसर है। पत्नी को खुजली की परेशानी है। लोगों का कहना है कि एक दशक से महिलाओं के गर्भाशय में कैंसर, गांठ के केस बढ़े हैं। पशुधन में भी गांठों की बीमारियां बढ़ रही हैं, गौधन में गर्भपात हो रहा है

हां, ऐसी जांच नहीं हुई
- खेतोलाई में रेडिएशन के कारण कैंसर का मामला सामने नहीं आया है। मिट्टी या पानी में रेडिएशन है या नहीं, इसकी जांच मेडिकल कॉलेज स्तर पर संभव है। अभी तक ऐसी जांच यहां नहीं की गई।
डॉ. बीएल गर्ग, प्रभारी चिकित्सक, स्वास्थ्य केन्द्र, पोकरण