
सरहदी जिले में दुर्लभ जंगली बिल्ली (कैराकल) के शव मिलने से वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वन्य जीवों का आरोप है कि दुर्लभ प्रजाति की इस बिल्ली का शिकार किया गया है, हालांकि वन विभाग के अधिकारी जांच करने की बात कह रहे हैं।
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों में रोष है। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार यह वीडियो जिले के सीमावर्ती घोटारू क्षेत्र का है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले जिले के मावा गांव में आधा दर्जन चिंकारा के अवशेष बरामद किए गए थे। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों का आरोप है कि विगत अर्से में जिले में बार-बार बेजुबान वन्य जीवों की मौत और शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त मॉनिटरिंग नहीं होने से शिकारी बेखौफ हो रहे हैं। क्षेत्र में प्रभावी निगरानी तंत्र और गश्त की कमी बताई जा रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कैराकल भारत में पाई जाने वाली सबसे दुर्लभ जंगली बिल्लियों में से एक है। इसके कानों पर काले लंबे बालों के गुच्छे इसकी प्रमुख पहचान होते हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों में पाई जाती है और पश्चिमी राजस्थान में ही कभी-कभार दिखाई देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में इसकी संख्या पहले ही बहुत सीमित है।
भारत में दुर्लभ कैराकल के शिकार, उसे पकडऩे या मारने पर बहुत सख्त सजा का प्रावधान है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है, जिसे बाघ और हाथियों के बराबर उच्चतम संरक्षण प्राप्त है। कैराकल के शिकार के दोषी को 3 से 7 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा कम से कम 10,000 से 25,000 या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हाल ही में इसे भारत में क्रिटिकली एंडेंजर्ड (गंभीर रूप से लुप्तप्राय) प्रजातियों की सूची में भी शामिल किया गया है।
कैराकल के शिकार या शव के साथ दुव्र्यवहार संबंधी घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही सीमावर्ती रेगिस्तानी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने और जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
Published on:
14 Mar 2026 11:40 pm
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