
Rajasthan Tourism: राजस्थान ही नहीं देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के तौर पर पहचान बना चुके जैसलमेर में पर्यटकों की आवक प्रतिवर्ष 8 से 10 लाख तक हो चुकी है और रामदेवरा में दर्शन करने आने वालों की संख्या को भी इसमें शामिल कर लें तो यह आंकड़ा 50 लाख या उससे भी अधिक हो जाता है। लाखों की तादाद में आने वाले सैलानियों की संख्या को और बढ़ाने की संभावनाएं भी अब तक कायम है।
बीते सालों के दौरान बॉर्डर और धार्मिक पर्यटन ऐसे आयाम हैं, जिनके चलते पर्यटन गतिविधियों में विशेष तौर पर तेजी आई है। इस दिशा में भी अभी तक काम करने की खूब गुंजाइश है। एक अनुमान के अनुसार यहां आने वाले सैलानियों के ठहराव को बढ़ाने में सफलता मिल जाए तो सालाना 300 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर पर्यटन क्षेत्र में बढ़ सकता है। वैसे जैसलमेर का पर्यटन व्यवसाय 1800 करोड़ के व्यवसाय का आंकड़ा छू चुका है।
सम्मिलितप्रयास हों
जैसलमेर जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शासन-प्रशासन से लेकर प्रत्येक क्षेत्र के पर्यटन व्यवसायियों को मिलकर प्रयास करने चाहिए। जैसलमेर शहर से लेकर ठेठ सीमावर्ती क्षेत्र में नवाचार लागू करने की दरकार है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को लाभ मिलने के साथ सरकार को भी राजस्व का प्रत्यक्ष फायदा होता है।
ये नवाचार आ सकते हैं काम
अब यहां आने वाले मेहमानों को ऐतिहासिक स्थलों व स्मारकों का भ्रमण करने के साथ कुछ नया चाहिए, जिसकी वे तीव्रता से अनुभूति कर सके।
रात्रि में पर्यटन गतिविधियों के विकास की संभावनाओं को अभी तक पूरी तरह से आजमाया नहीं गया है। गत समय से गड़ीसर सरोवर में लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत किए जाने से यह जगह दिन के साथ रात में भी सैलानियों से गुलजार रहने लगी है।
जैसलमेर की एक पुता पहचान अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की है। यहां तनोटराय मंदिर व उससे 18 किलोमीटर दूर बीएसएफ की बबलियानवाला पोस्ट पर करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य करवाए गए हैं। सैलानियों का जुड़ाव बढ़ाने के लिए बॉर्डर ट्यूरिज्म के विविध आयामों का प्रस्तुतिकरण निश्चित रूप से पर्यटन को बढ़ावा देने वाला साबित होगा।
जैसलमेर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को फूड क्लास से नया अनुभव करवाया जा सकता है। जिसमें उन्हें किचन उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपनी पसंद के उनके देश के व्यंजन बनाएं या स्थानीय व्यंजन बनाना सीखें।
जैसलमेर में मरु महोत्सव के मौके पर होने वाला कैमल पोलो मैच सहित रेगिस्तान के जहाज से जुड़ी अन्य दर्शनीय गतिविधियों के आयोजन सम-खुहड़ी आदि में नियमित तौर पर करवाई जा सकती हैं।
बरमसर व लाणेला के रण में मरु महोत्सव के अलावा पर्यटन सीजन के दिनों में छोटा पशु मेला लगाया जा सकता है और घुड़ दौड़ आयोजित की जा सकती है। ये गतिविधियां भी सैलानियों के आकर्षण का अतिरिक्त केंद्र बन सकती हैं।
जैसलमेर के बारे में और प्रचार प्रसार की जरूरत शेष है। विशेषकर यहां पहुंचने वाले सैलानियों को सांगोपांग जानकारियां उपलब्ध करवाने के लिए पर्यटन विभाग को सक्रिय बनाया जाना चाहिए।
किसी भी पर्यटन क्षेत्र में गाइडिंग करने वाले स्थान विशेष के राजदूत के समान होते हैं। यहां गाइड्स की संख्या में तो वृद्धि हो चुकी है। अब उनकी समानजनक फीस लागू की जानी चाहिए और उनके लिए ड्रेस कोड लागू होना चाहिए।
उनका समय-समय पर लिखित मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए। उन्हें विषय विशेषज्ञों की ओर से रिफ्रेशर कोर्स में व्यायान दिलवाया जा सके।
Published on:
06 Jun 2024 02:10 pm
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