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लाठी कस्बे में मानवता, सेवा और आस्था का अनूठा उदाहरण देखने को मिला, जहां ग्रामीणों ने एक मृत वानर का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया। सनातन परंपरा में वानर को बजरंगबली का स्वरूप माना जाता है। इसी आस्था के चलते ग्रामीणों ने पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कर श्रद्धांजलि अर्पित की।जानकारी के अनुसार शुक्रवार को एक कार की चपेट में आने से वानर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
उपचार नहीं मिलने से उसने देर रात दम तोड़ दिया। शनिवार सुबह सूचना मिलने पर वन्यजीव संरक्षण ग्रुप के संचालक विक्रम दर्जी और उनकी टीम ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। सामाजिक कार्यकर्ता नेमीचंद दर्जी के अनुसार वानर को स्नान कराकर लाल वस्त्र ओढ़ाया गया तथा पुष्पमालाएं अर्पित कर श्रद्धापूर्वक शवयात्रा निकाली गई। बाद में जगदम्बा माता मंदिर के पास निर्धारित स्थान पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार समाधि दी गई। सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश देवड़ा ने लोगों से घायल और बेसहारा पशुओं की सहायता के लिए आगे आने की अपील की। ग्रामीणों ने इस कार्य को संवेदनशीलता और जीवों के प्रति सम्मान की मिसाल बताया।
इस दौरान नेमीचंद दर्जी, जयप्रकाश देवड़ा, भरत सुथार, खुशाल सेन, चमन पंवार, दिनेश, अमृत बंजारा, घेवरराम, भूपेंद्र सिंह, लक्ष्मण, नकतराम, जेठाराम लोहार, पिंटू, रामूराम, इंद्राराम, नवलाराम, जुजेश पंवार और देवीलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। घटना के बाद घायल वानर के उपचार और रेस्क्यू व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी सामने आई। वन्यजीव संरक्षण ग्रुप के संचालक विक्रम दर्जी ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद संबंधित विभागों से समय पर सहायता नहीं मिली। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने व्यवस्था पर सवाल उठाए और त्वरित रेस्क्यू प्रणाली की आवश्यकता जताई।
लाठी क्षेत्र के धोलिया गांव में पशुपालन विभाग की ओर से शनिवार को निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय पशुपालकों ने भाग लेकर अपने पशुओं का निःशुल्क उपचार कराया। इसके साथ ही वैज्ञानिक पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त कीं। लाठी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नदीम ने बताया कि शिविर का आयोजन संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश वारंगटिवार के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुपालकों को उनके घर के नजदीक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा पशुपालन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेकर उनका समाधान करना रहा।
इस दौरान पशुपालकों को वैज्ञानिक गतिविधियों और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। दूर-दराज की ढाणियों में रहने वाले पशुपालकों को टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से घर बैठे पशु चिकित्सा सेवाओं का लाभ लेने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पशुओं का निःशुल्क बीमा कराने की अपील भी की गई। कर्रा बीमारी की रोकथाम के लिए पशुओं को बाड़ों में रखने तथा मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निस्तारण करने की सलाह दी गई। भादरिया पशु चिकित्साधिकारी डॉ. लोकेश कुमार ने बताया कि शिविर में 114 पशुपालकों के कुल 480 छोटे-बड़े पशुओं की जांच और उपचार किया गया। इनमें कृमि संक्रमण, खान-पान और पाचन संबंधी समस्याएं, गर्भधारण में कठिनाई तथा दूध उत्पादन से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रहीं। चिकित्सकों ने पशुपालकों को आवश्यक उपचार और परामर्श भी उपलब्ध कराया। शिविर में विभागीय कार्मिकों ने भी सक्रिय सहयोग किया।
Published on:
16 May 2026 08:36 pm
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