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मंदिरों में होती है सत्संग, होली के भजनों का होता है गायन, उमड़ती है महिलाओं की भीड़

हिन्दी कैलेंडर का सबसे अंतिम महिना फाल्गुन है। इस महिने में कई पर्व व त्यौहार मनाए जाते है। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण फागोत्सव व होली प्रमुख है। पश्चिमी राजस्थान में फाल्गुन माह लगते ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो जाती है।

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मंदिरों में होती है सत्संग, होली के भजनों का होता है गायन, उमड़ती है महिलाओं की भीड़

मंदिरों में होती है सत्संग, होली के भजनों का होता है गायन, उमड़ती है महिलाओं की भीड़

हिन्दी कैलेंडर का सबसे अंतिम महिना फाल्गुन है। इस महिने में कई पर्व व त्यौहार मनाए जाते है। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण फागोत्सव व होली प्रमुख है। पश्चिमी राजस्थान में फाल्गुन माह लगते ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो जाती है। साथ ही सत्संग व भजनों का दौर चलता है। कस्बे में भी हो रहे फागोत्सव के आयोजनों से माहौल पूरी तरह से धर्ममय हो गया है। गौरतलब है कि हिन्दी कैलेंडर के अंतिम फाल्गुन माह की शुरुआत संकष्टी चतुर्थी से होती है और महाशिवरात्रि, फुलैरा दूज, विनायक चतुर्थी जैसे पर्व मनाए जाते है। फाल्गुन माह का समापन होलिका दहन व होली के त्यौहार के साथ होता है। फाल्गुन माह में विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। पश्चिमी राजस्थान में फाल्गुन माह में फागोत्सव मनाकर मंदिरों, गली मोहल्लों, घरों में सामुहिक रूप से भजनों का गायन किया जाता है। जिनमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और हर्षोल्लास के साथ फागोत्सव मनाया जाता है। कस्बे में भी फाल्गुन माह लगने के साथ भजनों का दौर शुरू हो चुका है।

मंदिरों में बह रही सुरों की सरिता

फाल्गुन माह में मंदिरों में सत्संग व भजनों की कड़ी में कस्बे के प्रमुख मंदिरों में आयोजन हो रहे है। कस्बे में फाल्गुन माह के दौरान सत्संग व भजनों का दौर चल रहा है। मंदिरों के अलावा कई गली मोहल्लों व घरों में भी आयोजन हो रहा है। महिला मंडलों की ओर से प्रतिदिन अलग-अलग जगहों पर भजनों का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही फूलों की होली खेली जा रही है।

होलाष्टक के साथ रात में होंगे कार्यक्रम

कस्बे में होलाष्टक के साथ ही पुरुषों की ओर से भी भजनों का आयोजन किया जाएगा। जिसके अंतर्गत अलग-अलग गली मोहल्लों में पुष्करणा समाज के युवाओं की ओर से होरी के रसिया कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें होलाष्टक शुरू होने से लेकर होली के त्यौहार तक प्रतिदिन रात के समय दो से तीन घंटे तक होली के भजनों का गायन किया जाएगा। साथ ही फूलों की होली खेली जाएगी। फाल्गुन माह में हो रहे भजनों के कार्यक्रमों से क्षेत्र का वातावरण धर्ममय हो रहा है।

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