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48 की जगह 96 से 120 घंटों में मिल रहा पानी,फिर कैसे बुझे प्यास ?

जैसलमेर. शहर के अधिकांश क्षेत्रों में पीने का पानी 48 की बजाय 96 से 120 घंटों के अंतराल में किया जा रहा है। इसी तरह से निर्धारित मापदंडों के मुताबिक प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना 135 लीटर पानी मुहैया करवाने में भी जिम्मेदार तंत्र विफल साबित हो रहा है।

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situation of drinking water crisis in Jaisalmer city

48 की जगह 96 से 120 घंटों में मिल रहा पानी,फिर कैसे बुझे प्यास ?

जैसलमेर. शहर के अधिकांश क्षेत्रों में पीने का पानी 48 की बजाय 96 से 120 घंटों के अंतराल में किया जा रहा है। इसी तरह से निर्धारित मापदंडों के मुताबिक प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना 135 लीटर पानी मुहैया करवाने में भी जिम्मेदार तंत्र विफल साबित हो रहा है। शहर में चार से पांच दिनों में होने वाली जलापूर्ति न तो पर्याप्त समय तक होती है और न ही पानी पूरे प्रेशर से पहुंचाया जा रहा है। वर्तमान तेज गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत विकट समस्या का रूप धारण कर चुकी है और अनेक लोग टैंकर से पानी खरीदने पर विवश हैं। दूसरी तरफ आपूर्ति किया जाने वाला पेयजल स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप भी सही नहीं माना जा सकता क्योंकि गजरूपसागर फिल्टर प्लांट अन्य स्टेशनों पर पानी के शुद्धिकरण के इंतजाम नाकाफी हैं।
पुख्ता मोनेटरिंग नहीं
जैसलमेर शहर में जलापूर्ति व्यवस्था नगरपरिषद के हवाले है और उसके अधिकारी तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं हैं। यही कारण है कि जिला मुख्यालय पर समान धरातल पर जलापूर्ति का दावा करने वाले अधिकारी सभी क्षेत्रों में लोगों की जरूरत के मुताबिक जलापूर्ति करने में विफल साबित हो रहे हैं। शहर के पैंतीस वार्डों में पेयजल वितरण असमान रूप से होने की शिकायतें अब आम हो चुकी हैं। कुछ क्षेत्रों में जहां पीने का पानी ज्यादा सप्लाई होता है तो भीतरी भागों सहित अधिकांश आवासीय कॉलोनियों में लम्बे अंतराल में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे गली-मोहल्लों में पीने के पानी की समस्या बहुत विकट हैं, जहां जलापूर्ति के वैकल्पिक साधन नहीं पहुंच सकते। वे पूरी तरह से नलों में आने वाले पानी पर ही निर्भर हैं।
हकीकत यह भी
- शहर में आपूर्ति किया जाने वाला पानी स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से उपयुक्त नहीं है।
-नलों में छोड़े जाने से पहले पानी को स्वच्छ करने के निर्धारित मानदंडों की पालना नहीं हो पा रही।
- पानी में एलम (फिटकरी) तक नहीं डाली जा रही और केवल ब्लीचिंग पाउडर से पानी का उपचार किया जा रहा है।
-गजरूपसागर फिल्टर प्लांट में क्लोराइजेशन प्लांट पिछले ६-७ साल से बंद ही पड़ा है।
-बड़ी तादाद में लोग 25-50 रुपए रोजाना खर्च कर कैम्पर का पानी पी रहे हैं।
-शहर में कई बार दुर्गन्धयुक्त पानी की आपूर्ति होती है, जिसे पीना तो दूर नहाने व अन्य उपयोग में भी नहीं ले पाते।

रोजमर्रा की परेशानी
चैनपुरा मोहल्ले में पेयजल आपूर्ति कभी चार तो कभी पांच दिन के अंतराल से होती है। इतने दिनों के बाद बमुश्किल 45-50मिनट तक ही पानी मिलता है और वह भी कम प्रेशर से। यह समस्या अब लाइलाज बनती जा रही है।
- महेन्द्र प्रताप, स्थानीय निवासी

शुद्ध पेयजल मिले
पानी की कमी तो है ही, साथ ही जो पेयजल उपलब्ध करवाया जा रहा है वह कई बार मटमैले रंग का होता है और स्वाद भी अजीब लगता है। अधिकारियों को पानी की शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए।
- विजयलक्ष्मी, गृहिणी