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पोकरण कस्बे में वर्षों पुराने ऐतिहासिक साथलमेर गांव के पास स्थित नरासर तालाब की खुदाई व सफाई करवाई जा रही है, जिससे तालाब का सौंदर्य खिलने लगा है। युवा सामाजिक कार्यकर्ता बलवंतसिंह जोधा की ओर से जनसहयोग से गत एक माह से नरासर तालाब की खुदाई करवाने का कार्य किया जा रहा है। जेसीबी व हिटाची मशीनें लगवाकर तालाब की खुदाई की जा रही है और मिट्टी निकालकर दूर डलवाई जा रही है। एक माह में तालाब 15 से 20 फीट तक गहरा हो चुका है। यहां अभी भी लगातार खुदाई व सफाई का कार्य जारी है। गौरतलब है कि कस्बे के उत्तर दिशा में स्थित पहाड़ी पर पोकरण बसने से वर्षों पूर्व साथलमेर नाम से बस्ती आबाद थी, जिसके बाद आबादी धीरे-धीरे पहाड़ी से नीचे आकर बस गई और यहां पोकरण कस्बा बसा। साथलमेर गांव के पास ऐतिहासिक नरासर तालाब, डूंगरसर तालाब, नरासर कुंड, माता का कुंड, कैलाश टेकरी मंदिर भी स्थित है, जो आज भी साथलमेर की यादों को ताजा करते है। यहां उस समय की कलात्मक छतरियां भी बनी हुई है।
विख्यात इतिहासकार मोहता नेणसी की ओर से लिखी पोकरण परगणे री विगत इतिहास के अनुसार यहां करीब 450 वर्ष पूर्व शासक नरोजी की ओर से नरासर तालाब खुदवाया गया था, जो उपेक्षा का शिकार बना हुआ था। बारिश के दौरान पहाड़ी से पानी एक तरफ कस्बे की तोलाबेरा नदी से होते हुए रिण क्षेत्र में जाता है तो दूसरी तरफ पहाड़ी के उत्तर दिशा में नरासर कुंड होते हुए नरासर तालाब पहुंचता है। यहां पायतन में जमा रेत के कारण कुछ दिनों तक पानी जमा रहने के बाद सूख जाता था। जिसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता बलवंतसिंह जोधा ने यहां खुदाई व सफाई करवाने का निर्णय लिया और गत एक माह से यहां कार्य भी लगातार जारी है।
सामाजिक कार्यकर्ता बलवंतसिंह जोधा की ओर से पूर्व में कस्बे के रामदेवसर व बांदोलाई तालाबों की खुदाई व सफाई करवाई जा चुकी है। इसके अलावा इन तालाबों के आगोर की संरक्षण का कार्य भी किया गया। आगोर को रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के साथ यहां तारबंदी करवाई गई। साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्थित ओरण, गोचर भूमि के संरक्षण, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के लिए भी जोधा की ओर से कार्य किया जा रहा है।
युवा सामाजिक कार्यकर्ता बलवंतसिंह जोधा ने बताया कि राजस्थान पत्रिका की ओर से तालाबों के संरक्षण, खुदाई व सफाई को लेकर गत कई वर्षों से अमृतम् जलम् अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान से उन्हें तालाबों की खुदाई एवं रख रखाव को लेकर प्रेरणा मिली। क्षेत्र में कई ऐसे तालाब है, जो सेटलमेंट की भूल के कारण राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। जिन्हें दर्ज करवाने के लिए भी उनकी ओर से प्रयास किए जा रहे है। नरासर तालाब के बाद जोधपुर रोड पर स्थित लूंगासर तालाब की खुदाई का कार्य शुरू किया जाएगा।
Published on:
09 May 2025 12:43 am
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