
लोक रचनाकार पूनमचंद सिखवाल रचित भक्त पूरण की रम्मत का मंचन शनिवार रात गोपा चौक में किया गया। कृष्ण कंपनी तेज मंडली रम्मत कला संस्थान के तत्वावधान में आयोजित रम्मत पूरी रात चली और इसमें भाग लेने वाले कलाकारों के अभिनय, भाव-भंगिमाओं के साथ पद्यात्मक संवादों की अदायगी ने दर्शकों को आनंदित कर दिया। मंच के पास पारम्परिक अंदाज में बैठे टेरियों ने कलाकारों का भरपूर साथ निभाया। रात करीब 10 बजे रम्मत का मंचन शुरू हुआ, जो सुबह तक चला। मध्यरात्रि से कथा ने पकड़ बनाई, जिसकी गिरफ्त में दर्शक पूरी रात बंधे रहे। लोक मनोरंजन की इस परम्परागत विधा का शहरवासियों ने खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने बार-बार दाद देकर कलाकारों की हौसला अफजाई की। रम्मत में पुराने और अनुभवी कलाकारों के साथ नए कलाकारों ने भी बारीकी से नृत्य और गायन की अदायगी की।
जैसलमेर जिले में पुरानी रम्मत कला को आज भी कई समर्पित लोगों ने जीवित रखा है। करीब सौ साल पुरानी रम्मत से पुराने समय में होने वाले युद्ध के समय सिपाहियों का मनोरंजन किया जाता था। बाद में यह आमजन के मनोरंजन का हिस्सा बन गई। परंपरागत रूप से होने वाली रम्मत में पुरुष ही महिलाओं के भी किरदार निभाते हैं। ख्याल में महिला पात्र को भी पुरुष ही निभाते है। जैसलमेर जिले में तेज कवि की ओर लिखित राजा भृतहरि, मोतीलाल सुगनलाल व्यास की ओर से लिखित सती-सावित्री ख्याल का मंचन व भक्त पूरणमल प्रचलन में है। जैसलमेर में विगत वर्षों से लगातार रम्मतों का मंचन कर इसे नई पीढ़ी से भी जोड़ा गया है। इसके कलाकार कई दिन पहले सोनार दुर्ग की अखेप्रोल में बाबा रामदेव मंदिर प्रांगण में अभ्यास करते हैं।
Updated on:
13 Jul 2025 09:25 pm
Published on:
13 Jul 2025 09:24 pm
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