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Jaisalmer crime- ‘चोर को पर्स थमाने’ जैसी कर रहे गलती और बन रहे शिकार

-साइबर क्राइम के बार-बार शिकार हो रहे जैसलमेर जिले के बाशिंदे-शातिरों के नए-नए पैंतरों में फंस रहे लोग

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जैसलमेर. सीमावर्ती जैसलमेर जिले में पुलिस के लिए साइबर क्राइम एक नई चुनौती के रूप में पेश हो रहा है। आए दिन जिले में कहीं न कहीं से ऐसा मामला सामने आ रहा है, जिसमें यहां से सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर बैठा कोई शातिर ठग मोबाइल फोन के एक कॉल से हजारों की चपत लगा देता है।ऐसे मामले निरंतर सामने आने तथा पुलिस व बैंक की ओर से जागरुकता के लिए किए जाने वाले प्रयास लगता है, पूरे नहीं पड़ रहे हैं।इस तरह की ठगी का शिकार ज्यादातर वे ही लोग हो रहे हैं, जो खुद अपने एटीएम के पिन नम्बर अथवा वन टाइम पासवर्ड कॉल करने वाले ठग को बता देते हैं। जिला पुलिस ने कुछ मामलों में सफलता भी अॢजत की है, लेकिन वह घटनाओं के अनुपात में कम ही है।
काम में ले रहे नए-नए फार्मूले
-ऑनलाइन ठगी अथवा साइबर क्राइम को अंजाम देने वाले तत्व नए तौर-तरीकों को अपनाकर आम आदमी को शिकार बना रहे हैं।
-मसलन, कभी वे किसी को फोन कर कहते हैं कि, उनका एटीएम अवधिपार हो गया है। उसे बंद होने से बचाने के लिए वे कार्ड पर लिखे 16 डिजिट वाली संख्या और पीछे लिखी एवीएस संख्या बताएं।
-इतनी जानकारी लेकर वे शिकार बनने वाले से आधे घंटे तक फोन स्विच ऑफ करने के लिए कहते हैं और जब ऐसा किया जाता है, तब उसके बैंक खाते से पैसा साफ कर दिया जाता है।
-ऐसे ही हाल में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों से रिसोर्ट अथवा होटल में रूम बुकिंग के लिए पेटीएम के माध्यम से पैसा जमा करवाने के नाम पर ओटीपी जानकार व्यवसायी के खाते से ही पैसा साफ कर दिया जाता है।
-जैसलमेर में पिछले चार दिनों में ऐसे दो मामले सामने आ चुके हैं। अन्य कईहोटल वालों के पास भी ऐसे फोन पहुंचे हैं। ओटीपी संख्या नहीं बताकर वे फिलहाल ठगी से बच गए हैं।
-कई बार बीमा पॉलिसी के बारे में पूछताछ कर आर्थिक अपराध भी कर लिया जाता है।जिले के विभिन्न पुलिस थानों में इस तरह के ऑनलाइन और फोन कॉल के जरिए ठगी के मामले पहुंच रहे हैं।

IMAGE CREDIT: patrika

सबकुछ निकलता है फर्जी
जानकारी के अनुसार साइबर क्राइम के मामलों में जब पुलिस कार्रवाई करते हुए अन्वेषण करती है, तब पता चलता है कि, फोन करने वाले ने सिम फर्जी नाम से ली होती है तथा लोकेशन भी फर्जी बताई जाती है। यहां तक कि मेल आईडी व पहचान पत्र भी बोगस जमा करवाए होते हैं।ऐसे में पुलिस के लिए कई बार ऐसे अपराध करने वालों को ढूंढऩा घास की ढेरी में से सुई खोजने जैसा मुश्किल काम होता है।
साक्षरता व बैंकिंग साक्षरता में पिछड़े हम
-साइबर क्राइम पिछले कुछ अर्से से देश भर में कानून व्यवस्था की चौकसी करने वाले पुलिस महकमे के लिए चुनौती बना हुआ है, लेकिन जैसलमेर जैसे पिछड़े जिले में ऐसी घटनाओं में ज्यादा तेजी देखी जा सकती है।
-इसका एक कारण जिले में साक्षरता दर में की कमी के साथ इस तरह की ठगी के तौर-तरीकों के प्रति लोगों में जानकारी की कमी होना है।
-वर्ष 2011 की जनगणना में जिले की साक्षरता दर 57 फीसदी आंकी गई थी और ग्रामीण क्षेत्रों ही नहीं शहरी इलाके में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो बैंकिंग साक्षरता के लिहाज से बेहद पिछड़े हैं।
-जानकारों के अनुसार ऑनलाइनठगी के पेशे से जुड़े ज्यादातर लोग तकनीकी जानकारियों से लैस युवा हैं तथा उनके हौसले इतने बुलंद हैं कि, कई बार वे ठगी करने के बाद अपना सिम भी बंद नहीं करते।

फैक्ट फाइल -
- 05 मामले औसतन प्रतिमाह सामने आ रहे ऑनलाइन ठगी के
-04 मामलों का पिछले अर्से के दौरान खुलासा
- 1.75 लाख से ज्यादा जिलावासियों के बैंक खाता
- 17 पुलिस थाने स्थापित है जिले में

साझा न करें कोई भी बैंकिंग जानकारी
यह बात सही है कि, साइबर क्राइम अथवा ऑनलाइन ठगी के मामलों के रूप में पुलिस के सामने नई चुनौती है। इससे बचने के लिए लोगों को स्वयं जागरुक होना पड़ेगा।किसी भी स्थिति में एटीएम की पिन संख्या तथा पेटीएम का ओटीपी फोन पर किसी को शेयर नहीं करना चाहिए।पुलिस के साथ बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान भी इस संबंध में लगातार जन-जागरण का प्रयास कर रहे हैं।इस तरह के कुछमामलों में जैसलमेर पुलिस को सफलता भी हासिल हुई है।
- गौरव यादव, जिला पुलिस अधीक्षक जैसलमेर