9 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jaisalmer- कारागृह में बंद विचाराधीन कैदियो को इन्होंने ऐसे कराया आत्मज्ञान

जिला कारागृह में मनाया गया अपराधी सुधार दिवस

2 min read
Google source verification
Jaisalmer patrika

District jurisdiction at Jaislamer

जैसलमेर. समाज कल्याण सप्ताह की कड़ी में जिला कारागृह जैसलमेर में अपराधी सुधार दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार गोयल, पूर्ण कालिक सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जैसलमेर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एलएन नागौरी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सहायक निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग हिम्मतसिंह कविया, सामाजिक सुरक्षा अधिकारी चन्द्रप्रकाश राव, अधीक्षक जिला कारागृह निरंजन शर्मा एवं सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता विभाग के कार्मिक एवं कारागृह में बन्द विचाराधीन बंदी उपस्थित थे। कार्यक्रम का आगाज सहायक निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने सभी आगन्तुक मेहमानों का स्वागत करते हुए अवगत कराया कि विभाग की ओर से 1 अक्टूबर से 07 अक्टूबर तक समाज कल्याण सप्ताह मनाया जाता है।

इस कड़ी में आज का दिन अपराधी सुधार दिवस के रूप में जिला कारागृह में मनाया जा रहा है । कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता है, समय काल एवं परिस्थिति उसको ऐसा कृत्य करने को मजबूर कर देती है कि वो यहां तक पहुंच जाता है। बंदी को इस स्थान को जेल नहीं समझ कर अपने कृत्य का चिन्तन स्थान समझना चाहिए। पूर्ण कालिक सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण गोयल ने बंदियों को विधिक चेतना सबंधी जानकारी दी। सचिव ने बताया कि भारत के संविधान में दण्डप्रणाली सुधारात्मक है, जबकि दूसरे कई देशों में ऐसा नहीं है, उसके द्वारा जो भी अपराध किया जाता है, उसके अनुरूप ही सजा का प्रावधान होता है। यहां आने पर अपने को बंदी एवं जेल को जेल नहीं समझ कर सुधारगृह एवं चिंतन स्थल समझना चाहिए। इस अवसर पर डॉ नागौरी ने कहा कि मनुष्य पैदा होने पर अपराधी नहीं होता है, लेकिन हालात के कारण आक्रोशित होकर अपने नियंत्रण को खो देता है, जिससे ऐसे हालात हो जाते है, लेकिन अचानक हुआ छोटा अपराध को आत्म चिन्तन एवं मनन से हल कर अच्छे नागरिक बने न कि इस स्थान से जाने के बाद बड़े अपराधी के रूप में अपने को बदल दें।