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अतिथि देवो भव: की गुम हो रही भावना… नियम-कायदे भी केवल बोर्डों तक सिमटे

स्वर्णनगरी में पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाओं व सुविधाओं को लेकर सैलानियों की नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही।

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स्वर्णनगरी में पर्यटन से जुड़ी व्यवस्थाओं व सुविधाओं को लेकर सैलानियों की नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही। पत्रिका से परिचर्चा में स्वर्णनगरी आने वाले पर्यटकों ने बनाए गए नियम और सहायता व्यवस्थाओं को केवल सूचना बोर्डों तक सीमित बताया। उन्होंने पत्रिका के सामने पीड़ा बयां की कि महंगे दाम, अव्यवस्थाओं और ठगी से उन्हें मायूसी हो रही है। उधर, नव वर्ष की सीजन के बाद निगरानी तंत्र भी कुछ कमजोर हुआ है।

मौके पर नहीं हो रहा समाधान

मनमानी वसूली या अव्यवस्था की शिकायत करते हैं, तो मौके पर कोई ठोस समाधान नहीं मिलता। हेल्पलाइन पर संपर्क करने पर भी समस्या तत्काल दूर नहीं हो पाती, जिससे नाराजगी बढ़ रही है।

-पूजा वर्मा, पर्यटक, निवासी नई दिल्ली

वसूल रहे अधिक राशि

पर्यटन से जुड़ी सेवाओं में तय दरों का पालन नहीं हो रहा। बेहतर सुविधा का झांसा देकर अधिक राशि वसूली जा रही है, जिससे जैसलमेर की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

-अमितसिंह, पर्यटक, निवासी लखनऊ

शिकायत करने पर कार्रवाई में देरी होने की बातें हम अपने साथी पर्यटकों से सुन रहे हैं। ऐसी बातें सुनकर यहां पर्यटक खुद को असहाय महसूस करते हैं और मन में नकारात्मक अनुभव लेकर लौटते हैं। स्थानीय स्तर पर त्वरित निगरानी और कार्रवाई की जरूरत है।

-मनोज नायर, पर्यटक, निवासी, कोच्चि

घूमने के दौरान आई परेशानियां

जैसलमेर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध शहर है, लेकिन यहां घूमने के दौरान कुछ परेशानियां भी सामने आईं। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। सोनार दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में अव्यवस्थित पार्किंग से जाम की स्थिति बनती है।

-विकास अग्रवाल, पर्यटक, निवासी, कानपुर

महसूस हो रही सुधार की जरूरत

जैसलमेर की विरासत और रेगिस्तानी सौंदर्य आकर्षक है, लेकिन पर्यटन व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत दिखती है। ठहरने और खाने के दाम मौसम के अनुसार अत्यधिक बढ़ा दिए जाते हैं, जिससे बजट बिगड़ जाता है। डिजिटल टिकटिंग, हेल्प डेस्क और शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।

-सीमा चौहान, निवासी, फरीदाबाद

…तो स्थानीय अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित

पर्यटन शहर की पहचान बनाए रखने के लिए केवल प्रचार नहीं, बल्कि सख्त निगरानी, पारदर्शी दर व्यवस्था और प्रभावी शिकायत समाधान तंत्र जरूरी है। स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

-अनिल पंडित, पर्यटन व्यवसायी, जैसलमेर