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JAISALMER NEWS- राजस्थान में जैसाण के विवाह समारोह की बात ही निराली…

4 दिनों में 1 हजार जोड़े बंधे विवाह बंधन में, 20 करोड़ का टर्न ओवर

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स्वर्णनगरी सहित जिले भर के गांवों में मांगलिक कार्यक्रमों की धूम
जैसलमेर. आज मेरे यार की शादी है..., लगता है जैसे सारे संसार की शादी है..., गीत सीमावर्ती जैसलमेर जिले में इन दिनों चरितार्थ होता नजर आ रहा है। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर गत 18 और आगामी 20 अप्रेल को जैसलमेर जिले में करीब 1 हजार जोड़े विवाह के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे हैं। आलम यह है कि गांव-गांव में शहनाइयों की गूंज है तो मांगलिक कार्यक्रमों के आयोजन में हर कोई व्यस्त। शहर में भी स्थितियां कुछ इसी प्रकार की है। शहर के लगभग सभी विवाह स्थल इस सावे में मांगलिक कार्यक्रमों के साक्षी बन ही रहे हैं, बड़ी होटलों में भी विवाह आयोजित करवाए जा रहे हैं।
बाजार में बरस रहा धर, मिल रहा रोजगार
-शादी समारोहों की धूम के चलते जिले भर में सभी तरह के व्यापारियों के साथ मजदूरों को काम मिल रहा है।
-खाद्यसामग्री, रेडिमेड वस्त्रों की दुकानों, कपड़े सिलाई करने वालों से लेकर टेंट हाउस वालों और विवाह स्थल पर विभिन्न प्रकार की मजदूरी करने वाले लोगों के पास काम की इफरात है।
-ऐसे ही प्रिंटिंग प्रेस वाले शादी कार्डों की छपाई में व्यस्त रहे।
-जैसलमेर शहर की गली-गली में विवाह एवं अन्य मांगलिक समारोहों की धूम होने से कई घरों पर रोशनियों से सजावट की गई है।
-सामुदायिक भवनों को दिलकश अंदाज में सजाया जा रहा है। बड़ी दावतों के जरिए जैसलमेर के बाहर से भी हलवाइयों व अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है।

शहर ही नहीं, गांवों में महंगी हुई शादियां
-जिले में 18 और 20 अप्रेल को होने वाली शादियों पर कम से कम 20 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
-यह खर्च एक शादी पर वर व वधु पक्ष की ओर से न्यूनतम एक-एक लाख रुपए व्यय किए जाने का है।
- शहरों में ही नहीं बल्कि गांवों में भी अब महंगी शादियों का दौर चल निकला है।
-शादी समारोहों के चलते जिले की अर्थव्यवस्था में तेजी का रुख देखा जा सकता है।

बीत गए वे दिन, गांव चले अब शहर की डगर...
पूर्व के वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में शादी समारोह बेहद सादगी से संपन्न हुआ करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।अब वहां भी शादियों में डीजे, लाइटिंग, टेंट डेकोरेशन, बड़े भोज, आरओ का पानी, कैटरिंग, फोटो व वीडियोग्राफी के साथ डिस्पोजल सामग्री आदि का चलन बन गया है। कई शादियों का बजट तो 20 से 50 लाख अथवा एक करोड़ रुपए तक भी होता है।यह सब गांवों में बिजली तथा सम्पर्क के रास्तों के बढऩे व विभिन्न कारणों से समृद्धि के पहुंचने से संभव हो सका है।
बाल विवाहों पर रही करीबी नजर
अक्षय तृतीया पर अथवा उसके आसपास नाबालिगों की शादियों पर प्रशासन ने करीबी नजर बनाए रखी। इस संबंध में सरकारी कार्मिकों को जमीनी स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी गई। जिसके चलते गांवों में भी बाल विवाह होने की एकाध घटना के अलावा अन्य कहीं से सूचना नहीं मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में अब शिक्षा के प्रचार-प्रसार तथा कानूनी कार्रवाई के भय से बाल विवाह होने की घटनाएं पहले की अपेक्षा खासी कम हो चुकी हैं।
फैक्ट फाइल -
-02 दिनों के दौरान बड़ी संख्या में शादियां
-20 करोड़ रुपए का खर्च होने का अनुमान
-2000 से ज्यादा लोगों को मिला सीधा रोजगार