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सोनार दुर्ग में रात को न नियम और न कायदे, बेरोकटोक हो रही आवाजाही

विश्व पर्यटन मानचित्र पर पहचान बना चुके ऐतिहासिक सोनार किले में असमय आने वाले अनजान लोगों से यहां के बाशिंदे परेशान है। गौरतलब है कि सोनार किले के जैन मंदिर, राजमहल, ऐतिहासिक तोप, लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित कई पर्यटन स्थल है, लेकिन उनके भ्रमण के लिए समय निर्धारित किया गया है।

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सोनार दुर्ग में रात को न नियम और न कायदे, बेरोकटोक हो रही आवाजाही

सोनार दुर्ग में रात को न नियम और न कायदे, बेरोकटोक हो रही आवाजाही

विश्व पर्यटन मानचित्र पर पहचान बना चुके ऐतिहासिक सोनार किले में असमय आने वाले अनजान लोगों से यहां के बाशिंदे परेशान है। गौरतलब है कि सोनार किले के जैन मंदिर, राजमहल, ऐतिहासिक तोप, लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित कई पर्यटन स्थल है, लेकिन उनके भ्रमण के लिए समय निर्धारित किया गया है। हकीकत यह भी है कि सोनार किले में भ्रमण करने के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किए जाने से यह स्थिति बनी है। गौरतलब है कि सुबह से लेकर शाम तक पर्यटन स्थल को निहारने के लिए सैलानियों की आवाजाही बनी रहती है। दुर्ग में बाकायदा इस समय दुकानें, रेस्टोरेंट्स व होटलें भी संचालित हो रही है। इस दौरान सैलानी के तौर पर यहां आने व जाने पर किसी के लिए रोक भी नहीं है। परेशानी तब बढ़ जाती है जब नगरपरिषद के वार्ड संख्या 16 व 17 में विभाजित और लिविंग फोर्ट में दुर्ग की संकड़ी गलियों व मोहल्ले में रात के समय भी अनजान लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में यहां रहने वाले लोगों में एकबारगी भय हो जाता है। गनीमत है कि आज तक कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई है।

न कोई पुलिसकर्मी और न सुरक्षा के प्रबंध

सुरक्षा के नाम पर सुबह के समय दुर्ग के प्रवेश द्वार पर यातायात व्यवस्था को लेकर यातायातकर्मी मौजूद रहते हैं। इसके बाद यहां कोई पुलिसकर्मी या गार्ड मौजूद नियुक्त नहीं है। जैसलमेर के कोटड़ी पाड़ा, कुण्ड, व्यासा, चौगान, टेवाटा, लधा, ढूंढा जैसे मोहल्लों में सैकड़ों परिवार रहते हैं। पर्यटन के लिहाज से उपयुक्त समय नहीं होने के बावजूद किसी पर रोक -टोक नहीं होने से दुर्गवासियों की परेशानी लाजमी है। कई बार सोनारदुर्ग के रहवासी मोहल्लों में कई बार अनजान लोगों की टोलियां घूमने आ जाती है, जिससे यहां रहने वाले लोग परेशान होते हैं। हकीकत यह भी है कि ऐतिहासिक सोनार किले में भ्रमण के लिए प्रशासनिक तौर पर कोई समय ही निर्धारित नहीं किया गया है।

इसकी है जरूरत-
सोनार दुर्ग में भ्रमण का समय निर्धारित होना चाहिए। -रात में जैन मंदिर, राजमहल आदि बंद होने के कारण दुर्ग में भ्रमण करने पर रोक होनी चाहिए।

्र-बाहरी व्यक्ति के प्रवेश से पूर्वआई-कार्ड की जांच करने व उसका इंद्राज करने की जरूरत।-काले शीशे वाले वाहनों के दुर्ग में प्रवेश पर हो रोक

-रात्रि में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस गश्त की है जरूरत