2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान सीमा पर पकड़े गए पाकिस्तान से आए शिकारी बाज की मौत, पोस्टमॉर्टम में होगा खुलासा

Trained Eagle Caught By BSF Dies : राजस्थान के जैसलमेर जिले के शाहगढ़ सीमा क्षेत्र में बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों द्वारा पकड़े बाज की गुरुवार को मौत हो गई है। यह बाज पाकिस्तान से उड़कर आया था। बाज के पैर में एक नंबर लिखी अंगूठी मिली थी। हालांकि, पक्षी से कोई एंटीना या ट्रांसमीटर जुड़ा नहीं पाया गया।

less than 1 minute read
Google source verification
Trained Eagle Caught By BSF Dies

Trained Eagle Caught By BSF Dies

Trained Eagle Caught By BSF Dies : राजस्थान के जैसलमेर जिले के शाहगढ़ सीमा क्षेत्र में बुधवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों द्वारा पकड़े बाज की गुरुवार को मौत हो गई है। यह बाज पाकिस्तान से उड़कर आया था। बाज के पैर में एक नंबर लिखी अंगूठी मिली थी। हालांकि, पक्षी से कोई एंटीना या ट्रांसमीटर जुड़ा नहीं पाया गया। ऐसा संदेह है कि यह पक्षी अरब परिवारों के सदस्यों के पास है, जो होउबारा बस्टर्ड का शिकार करने के लिए पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। जवानों ने बाज को पकड़कर आगे की जांच के लिए वन विभाग को सौंप दिया था।

हालांकि, वन विभाग के रेस्कयू सेंटर में बाज की आज मौत हो गई। सूत्रो के अनुसार, गश्त करते वक्त बीएसएफ के जवानों ने बाज को भारतीय इलाके साउथ सेक्टर डाबला में उड़ते हुए देखा, जिसे बाद में पकड़ लिया गया था। संभावना है कि यह बाज अरब देशों के शाही परिवारों के सदस्यों का है जो हाल ही में बीकानेर और जैसलमेर जिलों से सटे पाकिस्तान के इलाकों में आए हैं। ये राज परिवार दुर्लभ होबारा बस्टर्ड का शिकार करने के लिए ऐसे प्रशिक्षित बाज का उपयोग करते हैं।

शिकार के लिए परमिट जारी करती है पाकिस्तान सरकार
अरब के राज परिवार शिकार करने के लिए इन पालतू बाज को अपने साथ लेकर पाकिस्तान आते हैं। शिकार करने के लिए पाकिस्तान सरकार इसके लिए इन परिवारों को परमिट जारी करती है। इसके लिए कथित तौर पर मोटी रकम वसूल की जाती है। गौरतबल है कि पूर्व में भी, सुरक्षाकर्मियों ने सीमा पर ऐसे कई पक्षियों को पकड़ा है, इस डर से कि उन्हें गलत इरादे के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ऐसे सभी पक्षियों को बाद में वन विभाग को सौंप दिया गया।