
ai photo
केस नं. - 1
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सम के व्याख्याता कल्याणाराम के खिलाफ संयुक्त निदेशक ने उन्हें 10वीं बोर्ड परीक्षा में उर्दू विषय के न्यून परिणाम के लिए 17 सीसीए कार्यवाही प्रस्तावित की है, लेकिन हकीकत यह है कि सम स्कूल में उर्दू विषय का कोई छात्र ही नहीं है। कल्याणाराम हिंदी साहित्य के व्याख्याता हैं, जिनका 10वीं में हिंदी विषय का परिणाम 90.91 प्रतिशत और 12वीं में 100 प्रतिशत रहा है।
केस नं. - 2
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बीदा में उर्दू के वरिष्ठ अध्यापक प्रवीण कुमार के स्कूल में भी उर्दू का एक भी छात्र नामांकित नहीं है। फिर भी, 10वीं बोर्ड में उर्दू के न्यून परिणाम के नाम पर उन्हें 17 सीसीए कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है। जबकि उनके अन्य विषयों का परिणाम शत-प्रतिशत है। नोटिस के कारण वह चिंतित और तनाव का सामना कर रहे हैं।
जिस शिक्षा विभाग के कंधों पर प्रदेश के भविष्य की बागडोर है, उसकी लापरवाही या दुर्भावनापूर्ण कार्यवाही से शिक्षक समुदाय में नाराजगी के स्वर मुखर हो रहे हैं। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच जहां शिक्षा मंत्री और जोधपुर प्रभारी मंत्री विपक्ष के निशाने पर हैं, वहीं संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) जोधपुर की ओर से बोर्ड परीक्षाओं के न्यून परिणाम के नाम पर 33 शिक्षकों को 17 सीसीए के तहत कार्यवाही प्रस्तावित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें उलटबांसी यह है कि ऐसे शिक्षकों को भी उर्दू विषय में स्कूल का परिणाम खराब रहने के लिए नोटिस दिए गए हैं, जिनके यहां उर्दू पढऩे वाला एक भी छात्र नहीं है। जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा के सचिव ने विधानसभा सत्र के दौरान सभी शिक्षकों के अवकाश निरस्त करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। ऐसे में जब पूरा शिक्षा विभाग हाई अलर्ट पर है। इस बीच शिक्षा विभाग, जोधपुर के संयुक्त निदेशक कार्यालय से निकला आदेश विवादों में घिर गया है। आदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के न्यून परिणाम के आधार पर शिक्षकों को दंडित करने का प्रावधान है, लेकिन जांच में पाया गया कि कई शिक्षकों को उर्दू विषय के खराब परिणाम के नाम पर चार्जशीट थमाई गई, जबकि उनके स्कूलों में उर्दू का एक भी छात्र नामांकित नहीं है।
संयुक्त निदेशक कार्यालय की घोर लापरवाही है। दूरस्थ शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री को तत्काल हस्तक्षेप कर लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
ऐसे जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए थे, उनकी सुनवाई करने के बाद उनके नोटिस ड्रॉप कर दिए गए हैं। शिक्षक अपने साथ न्यून नामांकन का प्रमाण पत्र लाए थे। उन्हें विभागीय पत्र जारी किए जा रहे हैं।
Published on:
05 Feb 2026 11:44 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
