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video Jaisalmer- वर्ष 2018 तक सरहद सील- क्या ‘मनचले धोरों’ की उड़ान रोकेंगे तरु व तकनीक ?

-जैसलमेर के सीमावर्ती शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में केन्द्रीय गृह विभाग की कवायद 

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Jitendra Kumar Changani

Aug 08, 2017

जैसलमेर
. सरहद पर शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा बल के साथ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पर्यावरणीय बदलाव तथा बॉर्डर सुरक्षा के आधुनिकतम उपायों को आजमाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। राजस्थान की 1040 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा का यही 32 किमी क्षेत्रफल तारबंदी होने के बावजूद सील नहीं है और कोई भी आसानी से धोरों पर चलकर ‘उस’ पार से ‘इस’ पार आ सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों से सटी पाकिस्तान की कुल अंतरराष्ट्रीय सीमा के 1040 किलोमीटर लम्बे क्षेत्र में
जैसलमेर
जिले के शाहगढ़ बल्ज के 32 किमी. में फैले शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या का तोड़ निकाल लिया गया है। सुरक्षा में सुराख साबित होते रहे इन आठ फीट ऊंची फेंसिंग इस इलाके में कोई मायने नहीं रखती क्योंकि यहां एक ही रात में जगह बदलने वाले धोरे 90 से 150 फीट ऊंचाई वाले होते हैं और उनके नीचे फेंसिंग ही नहीं बल्कि 10 मीटर की ऊंचाई वाले बांस पर सीमा सुरक्षा बल की तरफ से लगाए जाने वाले रिफ्लेक्टर आदि दब जाते हैं। यहां अनुमान से ही बल के सीमा प्रहरी नए सिरे से लकडिय़ां गाडक़र ‘बॉर्डर’ खड़ी करते हैं।

मोरक्कों व इजराइल तकनीकों का इस्तेमाल

सीमा सुरक्षा बल को कुछअर्सा पहले
जैसलमेर
वन विभाग के डीडीपी खंड ने शाहगढ़ बल्ज के शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या वाले सीमा क्षेत्र में सघन पौधरोपण कर रेत का प्रसार रोकने का प्लान बनाकर दिया था। इसके अंतर्गत वन विभाग ने प्रायोगिक तौर पर 25 बीघा क्षेत्रफल में स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष् ा और कांटेदार पेड़लगाने का पायलट प्रोजेक्ट सौंपा था, जिसे बल ने विचार के लिए केंद्रीय गृह विभाग को भेजा। गृह विभाग ने इस संबंध में सर्वे करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी को जिम्मा दिया। उधर, मरुस्थलीय क्षेत्र में बॉर्डर को पूरी तरह से सील करने के लिए मोरक् कों व इजराइल की पद्धतियों व अन्य देशों की तरफ से काम में ली जाने वाली तकनीक को अपनाने पर भी केंद्रीय गृह मंत्रालय स्तर पर गंभीरता से प्रयास प्रारंभ हो चुके हैं।

इस बीच सीमा सुरक्षा बल ने शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में पौधरोपण का काम शुरू कर दिया है। हाल के
मानसून
में पौधे लगाने के काम में तेजी लाई गई है। बल की तरफ से
जैसलमेर
के स्थानीय वातावरण में आसानी से पनपने वाले पौधों का रोपण किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि, केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष में शाहगढ़ के सीमा क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंडड्यून्स की समस्या से निजात पाने के लिए उपाय कर लेगी, क्योंकि वर्ष 2018 तक पाकिस्तान से सटी सभी सीमाओं को पूर्णतया सील करने का लक्ष्य सरकार ने घोषित कर रखा है।

पेड़ों से रुका है मरुस्थल विस्तार

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जैसलमेर
जिले में पिछले तीन दषकों के दौरान मरुस्थलीय प्रसार को रोकने के लिए पौधरोपण का सबसे कारगर प्रयोग इंदिरा गांधी नहर परियोजना के निर्माण के समय किया गया।

-वर्ष 1980 के दशक में नहर निर्माण के समय उडक़र आने वाली मिट्टी से आने वाली दिक्कतों के मद्देनजर नहर के दोनों छोर पर पेड़ों की कतारें लगाई गई थी।

-पेड़ों के पनपने के बाद मिट्टी की उड़ान पर लगभग रोक लग गई और आज तक मुख्य नहरों में जल प्रवाह में बाधा नहीं आ पाई।

-शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में पौधरोपण कर धोरों की रफ्तार और विस्तार दोनों को रोकने की योजना बनाई गई है।

टॉर्च तथा ड्रेगन लाइट से पहरा
-शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में धोरों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरकने की समस्या इतनी विकट है कि, वहां की गई सिंगल फेंसिंग के साथ 10 मीटर की गहराई और इतनी ही ऊंचाई में लोहे के एंगल पर लगाए जाने वाले रिफ्लेक्टर तक रेत के नीचे दब जाते हैं। ऐसे ही कच्चे रास्ते, सीमेंट के पिलर भी रेत में दबकर रह जाते हैं। सीमा सुरक्षा बल के प्रहरियों व अधिकारियों को ऐसे में अंदाजा लगाकर ही सीमा की चौकसी करनी पड़ती है। बल के लिए राहत की बात यही है कि, धोरे पाकिस्तान के सीमा क्षेत्र में भी दूर-दूर तक पसरे हुए हैं। इसके अलावा यहां अभी तक फ्लड लाइट की व्यवस्था नहीं की जा सकी है, जिसके चलते बल के प्रहरियों को टॉर्च तथा ड्रेगन लाइट लेकर रात में पहरा देना होता है।

फैक्ट फाइल -
-32 किमी लम्बा है शाहगढ़ बल्ज का षिफ्टिंग सेंडड्यून्स क्ष् ोत्र
-472 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जैसलमेर जिले में
-2018 तक सरहद को सील करने का लक्ष् य
-150 फीट तक ऊंचे हैं सीमा पर रेत के टीले

कर रहे समाधान का प्रयास
सीमा सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंडड्यून्स की समस्या से निपटा जाए। इसके लिए पौधरोपण और अत्याधुनिक तकनीकी का सहारा लिया जाना है।बल की तरफ से प्रायोगिक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।
-अनिल पालीवाल, आईजी, सीसुब, जोधपुर/strong>