
टॉर्च तथा ड्रेगन लाइट से पहरा
-शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में धोरों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरकने की समस्या इतनी विकट है कि, वहां की गई सिंगल फेंसिंग के साथ 10 मीटर की गहराई और इतनी ही ऊंचाई में लोहे के एंगल पर लगाए जाने वाले रिफ्लेक्टर तक रेत के नीचे दब जाते हैं। ऐसे ही कच्चे रास्ते, सीमेंट के पिलर भी रेत में दबकर रह जाते हैं। सीमा सुरक्षा बल के प्रहरियों व अधिकारियों को ऐसे में अंदाजा लगाकर ही सीमा की चौकसी करनी पड़ती है। बल के लिए राहत की बात यही है कि, धोरे पाकिस्तान के सीमा क्षेत्र में भी दूर-दूर तक पसरे हुए हैं। इसके अलावा यहां अभी तक फ्लड लाइट की व्यवस्था नहीं की जा सकी है, जिसके चलते बल के प्रहरियों को टॉर्च तथा ड्रेगन लाइट लेकर रात में पहरा देना होता है।
फैक्ट फाइल -
-32 किमी लम्बा है शाहगढ़ बल्ज का षिफ्टिंग सेंडड्यून्स क्ष् ोत्र
-472 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जैसलमेर जिले में
-2018 तक सरहद को सील करने का लक्ष् य
-150 फीट तक ऊंचे हैं सीमा पर रेत के टीले
कर रहे समाधान का प्रयास
सीमा सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद बनाने के लिए जरूरी है कि शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंडड्यून्स की समस्या से निपटा जाए। इसके लिए पौधरोपण और अत्याधुनिक तकनीकी का सहारा लिया जाना है।बल की तरफ से प्रायोगिक स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।
-अनिल पालीवाल, आईजी, सीसुब, जोधपुर/strong>
Published on:
08 Aug 2017 09:07 pm
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