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खींवरासर के ग्रामीणों ने जताया रोष, कहा- नहीं डालेंगे वोट

फलसूंड तहसील के राजस्व ग्राम खींवरासर के निवासियों ने आगामी सभी चुनावों के बहिष्कार का सामूहिक निर्णय लिया है।

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फलसूंड तहसील के राजस्व ग्राम खींवरासर के निवासियों ने आगामी सभी चुनावों के बहिष्कार का सामूहिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए अवगत कराया कि यदि ग्राम को पुनः उसकी मूल ग्राम पंचायत नेतासर में शामिल नहीं किया गया, तो मतदान नहीं किया जाएगा।पूर्व जिला परिषद सदस्य छोगाराम मेघवाल ने बताया कि खींवरासर गांव नेतासर पंचायत से डामरीकृत सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि हाल ही में इसे पुनर्गठित मानासर पंचायत में शामिल कर दिया गया है, जहां तक पहुंचने के लिए पगडंडी तक नहीं है। नेतासर पंचायत गांव से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि मानासर की दूरी लगभग 10 किलोमीटर है। उन्होंने यह भी कहा कि खींवरासर अनुसूचित जाति बहुल गांव है और नेतासर पंचायत भी इसी वर्ग का बाहुल्य क्षेत्र है। ऐसे में वहां सामाजिक, प्रशासनिक और विकासात्मक सुविधाओं से जुड़ाव स्वाभाविक रूप से संभव है। वहीं, मानासर पंचायत में अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व न के बराबर है, जिससे खींवरासर के लोगों की बात सुनी जाने की संभावना नगण्य रहेगी। वार्ड पंच जेठाराम गोयल ने बताया कि पुनर्गठन प्रक्रिया में गांव के किसी भी व्यक्ति से राय नहीं ली गई। न तो जनसुनवाई हुई, न ही ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित किया गया। ग्रामीणों ने इसे राजनीति से प्रेरित निर्णय बताया और कहा कि यह न केवल भौगोलिक दृष्टि से अव्यावहारिक है, बल्कि सामाजिक रूप से भी विभाजनकारी है।ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर विचार नहीं करता, तो वे आने वाले प्रत्येक चुनाव में मतदान से दूरी बनाए रखेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में छोगाराम मेघवाल, जेठाराम गोयल, राणाराम, मुकनाराम, खेंगारराम, अचलाराम, अर्जुन पंवार, अम्बाराम परिहार, नारायण गोयल सहित समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।

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