
जालौन . ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने की पहल सरकार ने शुरू कर दी है। लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहे चंदेलकालीन कालपी के ऐतिहासिक किले के दिन जल्द बहुरेंगे। मुख्यमंत्री ने इस किले के संरक्षण और सुंदरीकरण के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। किले को बचाने के लिए यमुना की कटान रोकने की व्यवस्था की जाएगी। किले का रखरखाव भी किया जाएगा। रोशनी के प्रबंध किए जाएंगे। यमुना पर पक्के घाट बनाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने इसके लिए एस्टीमेट तैयार करने के निर्देश बेतवा नहर विभाग को दिए हैं।
संरक्षण के लिए कई बार उठी आवाज
इस किले की हालत काफी समय से दयनीय बनी हुई है। संरक्षण न होने की वजह से इसका अस्तित्व मिटने की कगार पर आ पहुंचा है। यमुना का कटान होने की वजह से इसके धंसने का खतरा बना हुआ है। कई बार किले के संरक्षण के लिए आवाज बुलंद की गई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब सरकार इसको लेकर गंभीर हुई है।
व्यास मंदिर किले तक लगेंगे बोल्डर
किले का रखरखाव तो किया ही जाना है, यमुना की कटान को रोकने के लिए व्यास मंदिर से किले तक बोल्डर लगाए जाएंगे। सीडीओ एसपी ङ्क्षसह ने बताया कि कालपी विधायक ने किले के संरक्षण के लिए विधानसभा में प्रश्न उठाया था जिसके बाद हाल ही में मुख्यमंत्री ने सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है।
चंदेल शासकों ने बनवाया था यह किला
कालपी के किले का इतिहास एक हजार वर्ष से अधिक पुराना बताया जाता है। चंदेल शासकों ने इस किले का निर्माण यमुना नदी के किनारे काफी ऊंचाई पर कराया था।पहले स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे सहित कई क्रांतिकारियों ने यहां पर मंत्रणा कर अंग्रेजों के विरुद्ध बिगुल फूंकने की रूपरेखा तैयार की थी। कभी यह किला क्रांतिकारियों का गढ़ रहा है।
ये होंगे कार्य
किले का रखरखाव किया जाएगा
कटान रोकने के लिए लगेंगे बोल्डर
यमुना पर बनेंगे पक्के घाट
कराई जाएगी लाइटिंग
1857 की क्रांति का गवाह
Published on:
09 Feb 2018 03:45 pm
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