
भीनमाल. सरकार की ओर से राजकीय अस्पतालों में मरीजों को राहत देने के लिए निशुल्क दवा योजना शुरू की।
गोविंदसिंह जैतावत. भीनमाल. सरकार की ओर से राजकीय अस्पतालों में मरीजों को राहत देने के लिए निशुल्क दवा योजना शुरू की। लेकिन सरकार की ओर से कुछ निशुल्क दवाएं लोगों के लिए निशुल्क नशा बनती जा रही है। अस्पताल में पहुंचने वाले कई लोग दर्द निवारक दवाओं के आदी होने से नशे के रूप में लेने लगे है। कई डोडा-पोस्त व नशे के आदी लोग तो हर दो दिन में अस्पताल पहुंच जाते है। ये लोग निशुल्क दवा काउण्टर से दर्द निवारक दवाई ले जाकर उन्हे नशे के रूप में उपयोग ले रहे है। वहीं क्षेत्र के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से उम्र दराज लोगों को शरीर व जोड़ों का दर्द सताता है, तो लोग अस्पताल पहुंच कर दर्द निवारक दवा ले लेते है। सरकारी अस्पताल में साल-दर-साल दर्द निवारक दवाईयों की खपत बढ़ रही है। अस्पताल में हर साल 25 से 30 हजार की खपत हर साल बढ़ रही है। पिछले तीन सालों में यह खपत दस गुना से भी ज्यादा बढ़ी। चिकित्सक दर्द निवारक गोलियों को खुले हाथ से बांट रहे हैं और लोग अब नशे की तरह इसे लेने के आदी हो चुके हैं। दर्द निवारक दवाई के सेवन के आदी होने से लगातार मानसिक रोगियों की तदाद बढ़ती जा रही है।
इसलिए बढ़ी खपत
सरकार की ओर से नया सवेरा कार्यक्रम के तहत डोडा-पोस्त के बंधाणियों को नशा छुड़वाने के लिए निशुल्क दवा के नाम पर दर्द निवारक गोलियां देना प्रारंभ किया। अफिम व डोडा पोस्त का नशा छोडने के समय नशेड़ी दिन में अधिकतम तीन गोली लेते थे, लेकिन शिविर के बाद नशेडिय़ों का दर्द कम नहीं हुआ तो उन्होंने इसकी डोज बढ़ा दी। नशेड़ी अब दिन में 5 से 10 गोली तक गटक रहे है। दूसरा कारण पानी में फ्लोराइड होने से ज्यादातर लोगों को दर्द की शिकायत रहती है, तो वे दर्द निवारक का ही सहारा ले रहे है। जिससे खपट बढ़ रही है। नि:शुल्क उपलब्ध होने वाली दर्द निवारक लोगों के लिए दर्द बनती जा रही है।
खतरनाक है गोलियां
सीएससी प्रभारी डॉ.एमएम जांगिड़ का कहना है कि दर्द निवारक गोलियों के अधिक एवं लगातार सेवन करने से मानसिक रोग व अवसाद बढ़ता है। वहीं लगातार सेवन से ये गोलियां सीधी किडनी व लिवर पर असर करती है। डोडा पोस्त छोडने के बाद नशेडिय़ों को दर्द निवारक गोलियों की लत सी लग गई है। वहीं फ्लोरोसिस के शिकार मरीज भी चिकित्सक के पास पहुंच कर दर्द निवारक गोली लिखने का बोलते है। चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग तो बिना परामर्श के ही दर्द निवारक गोलियां ले लेते है। ऐसे में लगातार सेवन से वे उनके आदी हो जाते है।
हर साल बढ़ती है खपत
दर्द निवारक दवाई के रूप में डाइक्लो पैरासिटामॉल, डाइक्लो फैनेक 50 एमजी, आईब्यु पैरासिटामॉल, आईब्यु 200 एमजी, आईब्यु 400 एमजी, ऐसीलोफेनैक पैरासिटामॉल की खपत बढ़ी है। राजकीय अस्पताल में वर्ष 2016 -17 में लगभग 4 लाख 43 हजार 8 80 दर्द निवारक दवाइयों की खपत हुई। वहीं वर्ष 2017-18 में यह बढक़र 4 लाख 6 7 हजार 950 तक पहुंच गई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर साल 20 से 25 हजार दर्द निवारक दवा की खपत बढ़ रही है।
दर्द निवारक दवाओं के सेवन से लोग मनोरोगी हो रहे हैं।
कम करने का प्रयास
&जिले में दर्द निवारक दवाइयों की खपत लगातार बढ़ रही है। लगातार से सेवन से मानसिक रोग के शिकार हो सकते है। जानकारी लेकर चिकित्सकों को आवश्यकता के अनुसार रोगी को दर्द निवारक देने के निर्देश देंगे। विभाग की ओर से लोगों को दर्द निवारक दवा के आदी नहीं होने के लिए प्रोत्साहित करेगें।
बाबुलाल विश्नोई, सीएमएचओ, जालोर
Published on:
12 Apr 2018 09:09 am
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