
Charma Disease in Cumin crop
हाड़ेचा. मौसम में अचानक आए बदलाव के चलते सांचौर व चितलवाना उपखण्ड के करीब दर्जन भर गांवों में इन चरमा रोग लगने से खेतों में खड़ी जीरे की फसल जलकर नष्ट हो रही है। कृषि अधिकारियों व बीमा कम्पनियों को अवगत करवाने के बावजूद कोई उचित कदम नहीं उठाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाईदे रही हैं। सांचौर उपखण्ड के डडूसन गांव में कई हैक्टेयर फसल पिछले तीन दिन से मौसम परिवर्तन के साथ ही चरमा रोग की चपेट में आने से नष्ट हो रही है। किसानों ने बताया कि चरमा रोग के चलते एक जगह से जीरा खराब होने पर धीरे-धीरे पूरे खेत में खड़ी फसल खराब हो जाती है। हालांकि किसानों की ओर से चरमा रोग के बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। इसके बावजूद फसलें खराब हो रही है।
अधिकारियों ने दी स्प्रे की सलाह
संाचौर कृषि विभाग के अधिकारियों ने जीरे में चरमा रोग से बचाव के लिए एम-45 व ट्रेडोफैलो दो ग्राम एक लीटर पानी में घोलकर स्प्रे की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम परिवर्तन के साथ ही सुबह ओस पडऩे से जीरे के पौधे में चरमा रोग लग जाता है। इधर, अधिकारियों की सलाह पर किसानों ने कई बार स्प्रे भी किया। इसके बावजूद फसल नष्ट हो रही है। सांचौर उपखण्ड के डडूसन, शिवनगर, विष्णुनगर, बावरला, डभाल व वासन, चितलवाना क्षेत्र के हाड़ेचा, हरिपुरा, ईसरोल, काछेला, गलीफा, मरटवा, आमली, सागड़वा, होथीगांव, जानवी, केसूरी, सूथड़ी व सुराचंद समेत कई गांवों में चरमा से जीरे की फसल खराब हो रही है।
इनका कहना...
पिछले सप्ताह से खेत में खड़ी जीरे की फसल चरमा रोग से नष्ट हो रही है। हालांकि फसल का बीमा करवाया हुआ है, लेकिन कृषि अधिकारियों व बीमा कम्पनी के जिला कोर्डिनेटर को अवगत करवाने के बावजूद सर्वे नहीं किया जा रहा है। ऐसे में हवा चलने से आस पास की फसलें भी खराब हो रही है।
- सुमेरसिंह, किसान, डडूसन व रामाराम सुथार, किसान, हरिपुरा
मौसम परिवर्तन से जीरे की फसल में चरमा रोग फैल रहा है। किसानों को इसके उपाय बताए गए हैं, वहीं कई किसानों ने भी फसल खराबे की जानकारी दी है। इस सम्बंध में बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों को अवगत करवाया है।
- देवेन्द्रसिंह, कृषि सहायक, सांचौर
जिले में कई किसानों की ओर से प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत जीरे की फसल का बीमा करवाया है। इस बारे में सांचौर कृषि विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। इसके बाद मौका रिपोर्ट तैयार करेंगे।
- राजेन्द्रसिंह भाटी, बीमा कम्पनी कोर्डिनेटर, जालोर
Published on:
25 Feb 2018 10:53 am
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