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शिविर में बेटियों को दी संस्कारों की सीख

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Daughters were taught the rituals

Daughters were taught the rituals

जालोर. अखिल विश्व राजपुरोहित खेतेश्वर युवा सेवा संघ ब्रह्मधाम आसोतरा के गादीपति तुलसाराम महाराज की आध्यात्मिक प्रेरणा से स्वामी आत्मानंद सरस्वती गुरु मंदिर में राजपुरोहित समाज की बालिकाओं का एक दिवसीय बालिका संस्कार शिविर आयोजित हुआ। शिविर में दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती महाराज व वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज का सान्निध्य रहा। शिविर में जालोर व आहोर तहसील की राजपुरोहित समाज की करीब पांच सौ बालिकाओं ने भाग लिया।
शिविर में डॉ. ध्यानाराम महाराज ने बालिकाओं को आचार विचार और व्यवहार के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि बिना संस्कारों की शिक्षा शून्य है। अगर हम शिक्षित है, तो हमे संस्कारित होना भी जरूरी है। जब समाज की बेटियां नैतिक व मानसिक रूप से सुदृढ़ होकर संस्कारों से परिपूर्ण होगी, तभी सही मायने में समाज का विकास होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षित व संस्कारित बालिकाओं से ही समाज में व्याप्त रूढि़वादिता व कुरीतियां दूर होगी। उन्होंने कहा कि समाज को सही मार्ग दिखाना ही संत समाज का उत्तरदायित्व है। उन्होंने सभी संतों से इसके लिए वृहद जागृति अभियान चलाने का आह्वान किया। वेदांताचार्य ने बालिकाओं को उचित दिनचर्या व खानपान के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से दूर रहकर हम संस्कारित होकर अपने समाज के गौरव का अनुसरण करे। उन्होंने कहा कि हमारा समाज संस्कारित व नेतृत्व करने वाला समाज है। ऐसे में हमें अपने संस्कार पक्षों को मजबूत बनाना जरूरी है।
स्वामी ने जलाई शिक्षा की ज्योत
बालिका संस्कार शिविर में दंडी स्वामी देवानंद महाराज ने स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वामी आत्मानंद महाराज ने मात्र सवा रुपए से शिक्षा की ज्योत जलाने का बीड़ा उठाया था। दृढ़ संकल्प व सकारात्मक विचारधारा के बूते स्वामी ने विभिन्न स्थानों पर छात्रावास निर्माण करवाए। जहां हजारों विद्यार्थियों ने विद्या अर्जन कर सरकारी व निजी क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए है। उन्होंने बताया कि स्वामी त्याग की तपोमूर्ति थे। उन्होंने अपने शिष्य की ओर से वाहन खरीदने के लिए मिली राशि से यह जमीन खरीदी थी। जिस पर आज यह समाधि मंदिर व धाम बना हुआ। उन्होंने बालिकाओं को अपने परिवार व समाज में बड़ों का सम्मान करने की सीख दी। स्वामी ने कहा कि सात्विक भोजन व सात्विक विचार रखकर हम जीवन में हर मुकाम हासिल कर सकते है। इस अवसर स्वामी आत्मानंद सरस्वती गुरु मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री नैनसिंह सांकरणा, शिविर के जिला संयोजक लक्ष्मणसिंह भागली सिन्धलान, शिविर संयोजक गोपालसिंह सांकरणा, शिविर सह संयोजक कपूर सिंह भागली पुरोहितान, महेंद्रसिंह शंखवाली, कैलाशसिंह सांकरणा, हनुमानसिंह बिठू, नाहरसिंह रायथल, नारायणसिंह अगवरी, जितेंद्रसिंह अगवरी, कल्याणसिंह कुंडली, सुरेंद्रसिंह नोरवा, अरविंदसिंह शंखवाली, गणपत सिंह, प्रियंका ऊण, दीपिका सांकरणा, डिम्पल भागली, जबरसिंह, जुहार सिंह शंखवाली, प्रकाशसिंह, मनीषसिंह सांकरणा, नरपतसिंह बिछावाड़ी, ललितसिंह खींचन, लालसिंह गोविंदला, बलदेवसिंह सांथू, अशोकसिंह रायथल समेत दानदाता तूफानसिंह सांकरणा, नारायण सिंह सांकरणा, चंपालाल सांकरणा, उम्मेद सिंह सांकरणा, सत्यदेवसिंह कालूड़ी, सांकरणा सरपंच महिपालसिंह, सत्तुराज रियांबड़ी व अन्य मौजूद रहे।