आजादी से पहले इस मंदिर में पाकिस्तान से आते थे श्रद्धालु

आजादी से पहले इस मंदिर में पाकिस्तान से आते थे श्रद्धालु

Dharmendra Ramawat | Publish: Mar, 25 2018 09:28:16 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

गांव में बिना दरवाजों के होते थे घर, प्रत्येक पूर्णिमा को आते हैं श्रद्धालु

हाड़ेचा. नेहड़ का एक सीमांत गांव, जहां स्थित माता के मंदिर की कहानी कुछ अलग ही है। देश की आजादी से पहले पाकिस्तान से भी श्रद्धालु इस मंदिर में माथा टेकने आते थे और आज भी माता के दरबार में मन्नत मांगने वाले भक्तों की झोली माता भर देती है। गांव के बड़े-बूढ़ों का कहना है कि जिस क्षेत्रमें यह मंदिर है, वहां चोर चोरी करने से भी घबराते थे। अगर चोरी कर भी लेते तो चुराया हुआ सामान गांव में छोडऩे के बाद ही चोर गांव की सीमा से बाहर जा पाते थे। हम बात कर रहे हैं नेहड़ के सीमांत क्षेत्र खासरवी गांव में स्थित ढब्बावाली (आवड़ माता) मंदिर की। यहां पर राजस्थान समेत अन्य राज्यों से भी माता के दर्शन के लिए हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं प्रत्येक पूर्णिमा को यहां मेला लगता है। श्रद्धालु ढब्बावाली माता मंदिर में माथा टेककर मंन्नत मांगते हैं। गादीपति भवानीगिरी ने बताया कि लोगों में आस्था होने से माता की धूणी पर कच्छ के रण सहित पाकिस्तान से भी लोग यहां रात्रि विश्राम करते थे। माता के चमत्कार से यहां कभी चोरी नहीं होती थी। वहीं मंदिर की छत नहीं होने से गांव में किसी भी घर पर छत नहीं बनवाई जाती थी। वहीं घर के दरवाजे तक नहीं लगवाए जाते थे। रात में कोई चोर चोरी कर लेता तो वह माता के चमत्कार के कारण गांव की सीमा पार नहीं कर पाता था। गांव में ही रातभर घूमने के बाद चुराया माल छोडऩे पर ही ही चोर गांव की सीमा पार कर पाते थे। पूर्व में पूजारी शक्तिगिरी की ओर से माता से मन्नत मांगने के साथ ही मंदिर का निर्माण कर मंदिर की छत बनवाई गई। इसके बाद गांव में अन्य घरों में छत बनाई गई।
भक्त के नाम से जानी जाने लगी आवड़ मां
सालों पूर्व ढब्बाभाई नाम के एक भक्त की ओर से मंदिर में पूजा अर्चना की जाती थी। भक्त को चमत्कार देने के बाद माता का नाम ढब्बावाली पुकारा जाने लगा। तब से आज तक इस माता को ढब्बावाली माता के नाम से जाना जाता है।
पूरी होती है मनोकामनाएं
यहां के श्रद्धालु व पुजारी बताते हैं कि माता से कोई भी मंन्नत मांगने पर भक्त की मनोकानाएं पूर्ण होती है। कामनाएं पूर्ण होने के बाद राजस्थान सहित अन्य राज्यों से हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु माता के दरबार में पूजा-अर्चना करने यहां आते हैं।
इस साल होगी प्रतिष्ठा
माता का नया मंदिर कई सालों से बना हुआ है, लेकिन अब तक मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हो पाई है। इस साल शरद ऋतु में माता के नए मंदिर की जोर शोर से प्राण-प्रतिष्ठा होगी। यहां मंदिर ट्रस्ट बना हुआ है।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned