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जालोर के नए कलक्टर से जिलेवासियों की इसलिए बढ़ी आस…कारण समझिये

- 53वें कलक्टर के रूप में निशांत जैन ने पदभार ग्रहण किया, पर्यटन विभाग के निदेशक पद पर कार्यरत थे इससे पहले

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- 53वें कलक्टर के रूप में निशांत जैन ने पदभार ग्रहण किया, पर्यटन विभाग के निदेशक पद पर कार्यरत थे इससे पहले

- 53वें कलक्टर के रूप में निशांत जैन ने पदभार ग्रहण किया, पर्यटन विभाग के निदेशक पद पर कार्यरत थे इससे पहले

जालोर. राजस्थान ही नहीं गुजरात तक हमारे गौरव की चर्चा और प्रशंसा होती है। जालोर उन ऐतिहासिक स्थल में शामिल है, जिसने अल्लाउद्दीन खिलजी तक को अपनी वीरता का लोहा मनवाया और अधीनता स्वीकार नहीं की। वहीं धार्मिक स्थलों के रूप में सुंधा माता, 72 जिनालय देशभर में विख्यात है। इतना सबकुछ होने के बाद भी जालोर जिला आज भी पर्यटन मानचित्र पर अपना स्थान बनाने में सफल नहीं हो पाया है। इसका प्रमुख कारण प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता है। वर्तमान में जालोर दुर्ग तक सडक़ निर्माण का कार्य अटका पड़ा है। पिछले दो कलक्टर ने इस प्रोजेक्ट पर सकारात्मक प्रयास किए हैं। अब जालोर में नए कलक्टर के रूप में निशांत जैन ने पदभार ग्रहण कर लिया है तो इनसे उम्मीदें और भी ज्यादा है। क्योंकि जालोर कलक्टर के रूप मेंं पदभार ग्रहण करने से पूर्व जैन निदेशक पर्यटन विभाग जयपुर में कार्यरत थे और इस महकमे के पेंच और कार्य को वे बेहतर समझते हैं। जालोर में पर्यटन की प्रबल संभावनाएं है और जालोर के पर्यटन से जुड़े प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं तो कलक्टर जैन से जालोर की अपेक्षाएं बढ़ जाती है।

इन क्षेत्रों में जालोर को मिल सकती है पहचान
जालोर दुर्ग अपनी विशालता, दुर्गमता और बनावट के लिए पहचान रखता है। वीर कान्हड़देव, वीरमदेव और हीरादे की गौरव गाथाएं आज भी दुर्ग की प्राचीरों में कैद है। इस दुर्गमतम दुर्ग तक स्थानीय लोग ही पहुंच पाते हैं। इसका कारण यह है कि पिछले दस साल से इस दुर्ग के लिए सडक़ निर्माण और रोप-वे के प्रोजेक्ट तो बने, लेकिन वे क्रियान्वित नहीं हुए। कलक्टर हिमांशु गुप्ता ने ठंडे बस्ते में पड़े जालोर दुर्ग के सडक़ निर्माण कार्य को फिर से जान फूंकने का प्रयास किया और काफी हद तक सफल भी रहे। यह प्रोजेक्ट फिर से चर्चा में आया और इस बीच उनका तबादला हुआ और कलक्टर नम्रता वृष्णि ने पदभार ग्रहण करने के बाद इस प्रोजेक्ट की क्रियान्विति का प्रयास किया, लेकिन अभी भी इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में बहुत कार्य शेष है।

आप इस मुहिम को आगे बढ़ाईये
सुंदेलाव तालाब पर पिछले तीन सालों में बड़े स्तर पर कार्य हुआ है, लेकिन अभी भी इस तालाब के विकास की कड़ी में सौंदर्यन के कार्य अटके पड़े हैं। तालाब पर वॉकिंग टे्रक, वॉकिंग ट्रेक पर रोशनी, तालाब में बरसाती पानी के बेहतर संग्रहण, फूड पार्किंग जोन के कार्य अधूरे हैं। जालोर का जालोर महोत्सव पहचान बना रहा है, लेकिन राज्य के मंच पर आज भी पहचान अधूरी है। प्रयास किए जाएं तो तीन दिवसीय जालोर महोत्सव में विदेशी पर्यटक भी पहुंच सकेंगे।

ये भी बन सकते हैं ट्यूरिस्ट प्वाइंट
सुंधा माता दर्शन के लिए गुजरात, महाराष्ट्र समेत देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी क्षेत्र में सुंधा माता कंजर्वेशन रिजर्व एरिया में भालुओं की भरमार है। इस क्षेत्र में बारिश के मौसम में मनोरम दृश्य होता है और झरने भी बहते हैं। इस क्षेत्र को भी ट्यूरिस्ट प्वाइंट के रूप में विकसित किया जा सकता है।

सिटी पार्क की कवायद
जालोर में वर्तमान में छोटे उद्यान ही है, जिनका निर्माण करीब 4 से पांच दशक पूर्व किया गया था। इन पांच दशकों में जालोर की आबादी काफी बढ़ी, लेकिन उसके मुकाबले विकास कार्य नहीं हो पाए। जिला मुख्यालय पर आज भी एक भी ऐसा पार्क नहीं है, जहां पर सुकून मिल सके। जालोर में वर्तमान परिस्थिति के अनुसार एक विशाल सिटी पार्क की आवश्यकता है।


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