
- गोपाष्टमी पर गो माता का पूजन कर गांव को सुखमय बनाए रखने की कामना की।
सायला. ओटवाला में चल रही गोकथा के दौरान छठे दिन साध्वी आराधना गोपाल सरस्वती के सान्निध्य में गोपाष्टमी पर्व मनाया गया। सवेरे गाय माता का अभिषेक किया गया और उनको शृंगारित किया गया। गो माता के अंग में मेहंदी, हल्दी, रंग के छापे लगाए गए। धूप-दीप, अक्षत, रोली, गुड़ आदि वस्त्र तथा जल से गाय का पूजन किया गया। धूप-दीप से आरती उतारी गई। प्रसाद भोग लगाया गया। गाय की परिक्रमा भी की गई। महोत्सव में साध्वी ने कहा कि दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गौ, ग्वाल और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने से विशेष लाभ मिलता है। भारतीय संस्कृति व वेदो में गौ माता को सर्वश्रेष्ठ पद दिया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गो चारण लीला शुरु की थी। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को गाय चराने के लिए जंगल भेजा था। गाय की पूजा करने से लोगों के कष्ट खत्म हो जाते हैं। मनुष्य को धर्मलाभ प्राप्त होता हैं। मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की विशेष पूजा अर्चना गोपाष्टमी पर की गई। साध्वी ने समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में आयोजित गो कथा का आयोजन के छठे दिन सत्संगप्रेमियों को संबोधित किया।
Published on:
05 Nov 2019 10:49 am
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