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सर्दी में काम आ रहा ये देसी जुगाड़, कचरे से गर्म हो रहा पानी

शहर में श्रीगंगानगर से बिकने को आए देसी जुगाड़

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Getting hot water from the waste

सर्दी में काम आ रहा ये देसी जुगाड़, कचरे से गर्म हो रहा पानी

जालोर. शहर में इन दिनों पड़ रही तेज सर्दी में पानी गर्म करने के लिए श्रीगंगानगर से देसी जुगाड़ बिकने को आए हैं। ये सर्दी में गर्म पानी करने के लिए किसी हीटर से कम नहीं है। जी हां सिर्फ दो मिनट में ही 25 से 55 लीटर पानी इस देसी जुगाड़ के जरिए गर्म किया जा रहा है। वहीं खास बात तो यह है कि इसमें पानी गर्म करने के लिए गैस या तेल की जरूरत नहीं है और ना ही इसके लिए बिजली का कनेक्शन चाहिए। इसके लिए चाहिए तो सिर्फ कचरा और वह भी आपको बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है। घर में रोजाना इक_ा होने वाला सूखा कचरा और थोड़े से कागज के टुकड़े इसके लिए खूब हैं। इस देसी जुगाड़ को क्षमता के अनुसार पहले पानी से भर दिया जाता है और फिर इसमें कचरा डालकर इसे जलाया जाता है। कचरे में आग लगाने के महज दो मिनट बाद ही इसमें लगे नल से गर्म पानी आना शुरू हो जाता है जो ना केवल नहाने-धोने के लिए बल्कि कपड़े और बरतन धोने में भी काम में लिया जा सकता है। बाजार में गर्म पानी करने के लिए मिलने वाले गीजर की तुलना में यह काफी सस्ता भी है। वहीं सर्दी की सीजन में रोजाना इस्तेमाल करने के बावजूद आपको बिजली का खर्च भी वहन नहीं करना पड़ेगा।
लोहे की चद्दर से बनाया देसी जुगाड़
शहर में बिकने को आए ये देसी जुगाड़ वजन में काफी हल्के हैं और आसानी से इन्हें उठाकर कहीं भी लाया-ले जाया जा सकता है। इस जुगाड़ को किसी मशीन में नहीं, बल्कि हाथों से ही बनाया गया है। इसके निर्माण के लिए लोहे की चद्दर और एंगल का उपयोग किया गया है। गोलाकार बने इस जुगाड़ के एक ओर ऊपर की तरफ ठंडा पानी डालने के लिए पाइप दे रखा है। वहीं दूसरी ओर नल लगा हुआ है। ठंडा पानी डालने के बाद कचरे को जलाया जाता है और दो मिनट में ही दूसरी ओर लगे नल से गर्म पानी आना शुरू हो जाता है।
अलग-अलग क्षमता वाले जुगाड़
शहर में इन दिनों बिकने को आए ये जुगाड़ अलग-अलग पानी की क्षमता वाले हैं। इनमें २५ लीटर से लेकर ४० और ५५ लीटर की क्षमता वाले जुगाड़ भी शामिल हैं। शुरुआती करीब पंद्रह सौ रुपए के आस पास है। इसी तरह अलग-अलग क्षमता वाले जुगाड़ की रेट भी अलग-अलग है।
ना फॉल्ट ना करंट का डर
देखा जाए तो पानी गर्म करने के लिए बिजली से चलने वाले गीजर और हीटर के मुकाबले ये देसी जुगाड़ काफी सस्ते और सुरक्षित भी हैं। इन्हें शुरू करने के लिए ना तो बिजली का कनेक्शन चाहिए और ना ही तेल। चाहिए तो सिफ सूखा कचरा। जबकि बिजली चलित उपकरणों में अक्सर फॉल्ट और करंट लगने का भी डर लगा रहता है।
स्वच्छता ने किया प्रेरित
श्रीगंगानगर से ये देसी जुगाड़ बेचने आए भैरूसिंह बताते हैं कि लोग घरों का कचरा भी बाहर सड़क पर फेंकते हैं जो उड़कर आस पास फैल जाता है। इस जुगाड़ की सहायता से ना केवल घर का कचरा नष्ट किया जा सकता है, बल्कि इससे गर्म पानी भी किया जा सकता है। कचरा जलने के बाद बची हुई राख कचरा संग्रहण वाहनों में डालने से कचरे की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।