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Rajasthan: मानसून सीजन में बजरी लीज क्षेत्र बंद, फिर भी राजस्थान के इस जिले में लगे हैं ढेर, जानें मामला

Jalore News: जालोर जिले में बजरी की एक भी लीज मौजूद नहीं है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट में सिरोही की लीज से बजरी पहुंच रही है।

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सरकारी प्रोजेक्ट में निर्माणस्थल पर लगे बजरी के ढेर। फोटो- पत्रिका

खनन नीति के विपरीत राजस्थान के जालोर जिले के बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में रोजाना पहुंच रही सैकड़ों टन बजरी सवालों के घेरे में है। जालोर ही नहीं सांचौर तक बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में बजरी के बड़े बड़े ढेर मौजूद है। जिन्हें वैध बताया जा रहा है, जबकि ज्यादातर स्टॉक अवैध ही है। इसका खुलासा तीन दिन पूर्व बिशनगढ़ पुलिस थाना निर्माण क्षेत्र के बजरी स्टॉक की जांच और विभागीय स्तर पेनल्टी वसूले के दौरान हो गया।

जालोर जिले में बजरी की एक भी लीज मौजूद नहीं है। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट में सिरोही की लीज से बजरी पहुंच रही है। अहम पक्ष यह है कि नियमानुसार 1 जुलाई से लीज क्षेत्र बंद है। मानसून सीजन के दौरान नदियों के प्रवाह को बरकरार रखने के लिए ऐसा किया जाता है। यह स्थिति 31 अगस्त तक रहती है। इस तरह से दो माह तक लीज क्षेत्र में बजरी के खनन पर रोक है, जबकि जालोर में बदस्तूर बजरी पहुंच रही है, जो सवालों के घेरे में है।

तर्क पर भी सवालिया निशान

विभागीय अधिकारी बताते हैं कि लीज बंद होने से पूर्व संबंधित लीज धारी बजरी का स्टॉक कर सकता है और उससे लीज बंद होने की अवधि के दौरान आपूर्ति करता है। अहम सवाल यह है कि क्या लाखों टन का स्टॉक संबंधित क्षेत्रों में मौजूद है, जिसकी एवज में रोजाना हजारों टन बजरी को पहुंचाया जा रहा है।

जबकि बिशनगढ़ और उससे पूर्व के कई सरकारी प्रोजेक्ट में बजरी के स्टॉक में यह सामने आ चुका है कि एजेसियां प्रोजेक्ट में वैध के मुकाबले बड़ी भारी मात्रा में स्थानीय स्तर से ही अवैध बजरी का उपयोग करती है, जो सहज और सस्ती दर पर उपलब्ध हो जाती है।

मानसून के बाद लीज क्षेत्र शुरु होने की संभावना

विभागीय अधिकारी बताते हैं कि जिले में 20 से अधिक लीज के लिए ऑक्शन हुए, लेकिन ईसी में मामले अटके। सांफाड़ा नदी प्रवाह क्षेत्र में अंतिम स्तर तक प्रक्रिया पूरी हो चुकी, लेकिन अभी मानसून सीजन सक्रिय होने से मामला अटका। यहां मानसून सीजन के बाद लीजें शुरु हो जाएंगी, जिसके बाद स्थानीय स्तर से बजरी उपलब्ध हो सकेगी।

आम आदमी परेशान, प्रोजेक्ट को राहत

खनिज विभाग ही नहीं पुलिस की डीएसटी टीम की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पिछले एक माह में टीम की ओर से बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई, जिसमें कुछे डंपर पकड़े गए। जबकि दूसरा अहम पक्ष यह भी है कि ज्यादातर बजरी से भरे ट्रेक्टर ही पकड़े गए, जो छोटी जरुरतों, घरेलू निर्माण कार्य में उपयोग के लिए मंगवाए गए। सीधे तौर पर डीएसटी टीम का भी बड़े बजरी माफियाओं पर रहम बरकरार है।

हकीकत-विभाग और डीएसटी की भी रेकी

डंपर और लोडर के जरिए भारी मात्रा में अवैध खनन करने वाले गिरोह की रेकी टीम भी सक्रिय है, जो पुलिस-डीएसटी और खनन विभाग की रेकी करती है। खनन माफियाओं की ओर से देर रात और अल सवेरे उस समय डंपर को लोडर से कुछ ही पल में भरने के साथ सरकारी कंस्ट्रक्शन साइट पर भेजा जा रहा है। जब तमाम जिम्मेदार महकमे नदारद होते हैं।

यह वीडियो भी देखें

सूत्र बताते हैं कि खनन माफियाओं को यह जानकारी है कि रात से लेकर अल सवेरे कब ये विभाग आराम की मुद्रा में होते हैं। इस अवधि में पूरी मशीनरी नदी में जुट जाती है और मात्र 1 से 2 घंटे के भीतर 10 से 15 डंपर भरने के साथ गंतव्य स्थानों को रवाना हो जाते हैं। रातों रात अवैध खनन का चलने वाला यह खेल बजरी के डंप होने के बाद अवैध बजरी को वैध में तब्दील कर देता है।

इन्होंने कहा

जालोर में फिलहाल बजरी लीज प्रक्रियाधीन है। बजरी लीज नियमानुसार 1 जुलाई से लेकर 31 अगस्त तक मानसून सीजन में बंद रहती है।
नरेंद्र खटीक, एमई, जालोर


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