- सांचोर में विश्नोई समाज की अनुकरणीय पहल, 8 साल में 300 से अधिक चिंकारों व अन्य हरिणों को बचाया
गजेंद्र सिंह दहिया
जालोर. वन्यजीवों की रक्षक जाति के रूप में पहचान रखने वाले विश्नोई समाज ने जालोर के सांचौर शहर में पूरी दुनिया के लिए एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। दुर्घटना व शिकारी जंतुओं से घायल हुए चिंकारों व अन्य हरिण के लिए धमाणा में रेस्क्यू सेंटर या यूं कहे कि हरिणों का अस्पताल ही खोल दिया है। बीते नौ साल में यहां अब तक 300 से अधिक चिंकारों का इलाज किया गया है। वर्तमान में स्वस्थ होने के बाद 200 चिंकारे यहां उद्यान में कुलाचें मारते हुए नजर आते हैं। चिंकारों के अलावा कुछ संख्या में ब्लैक बग, खरगोश, मोर और बंदर का भी यहां उपचार किया जाता है।
सांचौर से आठ किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 68 पर धमाणा गांव में तीन हेक्टेयर जमीन पर वर्ष 2011 में अमृता देवी उद्यान की स्थापना की गई। यहां विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। दो साल बाद वर्ष 2013 से यहां घायल हरिणों का इलाज व रेस्क्यू शुरू किया गया। आसपास के गांवाें से ग्रामीण घायल वन्यजीवों को यहां ले आते हैं। इलाज के दरम्यान यहां उद्यान में जंगल जैसा वातावरण मिलने से अधिकांश हरिण यहां पालतू बनकर रह जाते हैं। वर्ष 2015 में यहां वन विभाग की चौकी खोली गई। वन विभाग उद्यान में चिंकारों की सुरक्षा व इलाज का प्रबंध करता है। वर्तमान में पशु चिकित्सक डॉ गणपत विश्नोई यहां नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं।
हरिणों के लिए अलग-अलग शेल्टर
उद्यान में घायल, गंभीर घायल और अत्यधिक शरारती हरिणों के लिए अलग-अलग शेल्टर बने हुए हैं। घायल चिंकारों के स्वस्थ होने के बाद उन्हें उद्यान में ही खुले में छोड़ दिया जाता है जहां वे अपने अन्य साथियों के लिए आराम से रहते हैं।पूरा प्रबंध ग्रामीण करते हैं
--------------------------
वन्य जीवों के लिए पानी, चारा, चना व अन्य खाद्य सामग्री का इंतजाम जन सहयोग से ही किया जाता है। वन्य जीवों को यहां बेहतर सुविधाएं व माहौल मिलने से वे पालतू हो जाते हैं।
-वीरमाराम विश्नोई, अध्यक्ष, अमृता देवी उद्यान स्मृति जनसेवा संस्थान, सांचौर
अधिकांश चिंकारा रह रहे हैं
वन विभाग की ओर से इलाज व सुरक्षा मुहैया करवाई जाती है। शेष खर्चा ग्रामीण देखते हैं। वर्तमान में यहां अधिकांश वन्यजीव चिंकारा ही हैं।
-ओपी विश्नोई, वनरक्षक, वन चौकी धमाणा, सांचौर