
जालोर. शहर के नया बस स्टैंड परिसर में 50 कियोस्कधारियों के होश उस समय खाफ्ता हो गए, जब परिषद कार्मिकों ने आते ही उन्हें कुछ ही घंटे में कियोस्क खाली करने की मोहलत दी। कियोस्क संचालकों ने नगरपरिषद कार्मिकों से कियोस्क खाली करने से पहले नियमानुसार नोटिस देने की बात भी कही, लेकिन किसी ने उनकी एक ना सुनी। ऐसे में निर्देश के कुछ ही देर बाद कियोस्क संचालकों ने दुकान से समान बाहर निकालना शुरूकर दिया। इस दौरान एक बेवा और कुछ लोगों की के आंसू बरबस ही छलक आए। पत्रिका टीम ने जब उनसे इसका कारण पूछा तो उनका यही कहना था कि कियोस्क की लीज जरूर खत्म हो गई थी, लेकिन दुकान बनाने और उसे जमाने में उनका खून-पसीना तक लग गया था। परिषद के अधिकारी चाहते तो इन्हें तोडऩे के बजाय किसी जरूरतमंद को भी अलॉट कर सकते थे।
कियोस्क संख्या 33
नया बस स्टैंड में 33 नंबर दुकान चला रहे कियोस्कधारी मुकेश कुमार का कहनाथा कि दुकान की लीज जरूर खत्म हो गई थी, लेकिन हजारों रुपए खर्च कर दुकान बनाई थी। परिषद चाहती तो किसी और को भी ये दुकान अलॉट कर सकती थी...।
कियोस्क संख्या 15
दुकान नंबर 15 के आवंटी हकीम पुत्र लाल खां का कहना था कि कियोस्क में पानी की बोतलें और नमकीन सहित अन्य सामान बेचते थे। उससे होने वाली आय से घर खर्च नहीं चल पाता था। ऐसे में किराए पर दुकान चलाना मजबूरी थी...।
कियोस्क संख्या 27
कियोस्क संख्या 27 के करनाराम पुत्र वगताराम जीनगर ने बताया कि जूती उद्योग देश भर में प्रसिद्ध है, लेकिन दुकान जमाने से पहले ही उठा दी गई। मुझे उम्मीद थी कि इससे मुझे आय होगी...।
इसका कौन बनेगा सहारा
शहर के प्राइवेट बस स्टैंड में भी बने कियोस्क हटाने के लिए निर्देश जारी किए गए, लेकिन सवाल यह है कि इन्हें हटाने के बाद बेरोजगारों को सहारा कौन देगा? हालांकि ये कियोस्क गुरुवार देर शाम तक तोड़े नहीं गए, मगर इनके टूटने के बाद कियोस्कधारियों को आश्रय नहीं मिल पाएगा। इस दौरा 31 नंबर कियोस्कधारक बेवा चंदा, मुस्ताक खां व सज्जन दवे के आंसू छलक आए।
Published on:
30 Jun 2017 09:36 am
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