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प्राइवेट पार्ट में डाला पेट्रोल… 4 दिनों तक पुलिस कस्टडी में किया टॉर्चर, अब थानेदार समेत 3 सस्पेंड

Bihar News: समस्तीपुर में चोरी के शक में गिरफ्तार एक युवक ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसे चार दिनों तक कस्टडी में रखा और टॉर्चर किया। मामला सामने आने के बाद एसपी ने थानेदार और दो अन्य पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया।
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समस्तीपुर

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Anand Shekhar

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Updated: 15 Jan 2026, 5:35 PM IST

Jamui police investigation

नाबालिग छात्र-छात्रा का रास्ता रोककर दुर्व्यवहार करने के मामले में पुलिस की आई प्रतिक्रिया (File Photo)

Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई बर्बरता ने एक बार फिर से पुलिस की छवि को खराब कर दिया है। चोरी के आरोप में गिरफ्तार एक युवक को न्याय दिलाने के बजाय, ताजपुर पुलिस ने उसे टॉर्चर किया। आरोप है कि पुलिस हिरासत में उसे बेरहमी से पीटा गया और उसके प्राइवेट पार्ट्स पर पेट्रोल डाला गया। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए समस्तीपुर SP अरविंद प्रताप सिंह ने SHO समेत तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।

चोरी से शुरू हुआ पूरा मामला

यह घटना 28 दिसंबर की रात ताजपुर पुलिस स्टेशन इलाके के नीम चौक स्थित 'सोनी फैंसी ज्वेलर्स' में शुरू हुई, जहां 28 किलो चांदी और 60 ग्राम सोने की चोरी की शिकायत दर्ज की गई थी। दुकान के मालिक जकी अहमद ने शक के आधार पर अपने कर्मचारी मनीष कुमार सहित दुकान के दो अन्य कर्मी को पुलिस के हवाले कर दिया। भेरोखरा का रहने वाला मनीष, संजय पोद्दार का बेटा है और एक महीने से दुकान में काम कर रहा था।

पीड़ित के अनुसार, कथित बर्बरता तब शुरू हुई जब उसे आधिकारिक तौर पर हिरासत में नहीं लिया गया था। उसका दावा है कि दुकान मालिक तीनों आदमियों को दुकान की छत पर ले गया, जहां उन्हें लोहे की रॉड और पाइप से पीटा गया और छत से नीचे फेंकने की धमकी दी गई।

चार दिन तक पुलिस हिरासत में टॉर्चर

मनीष के सबसे गंभीर आरोप पुलिस पर हैं। पीड़ित का दावा है कि उसे 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया, जहां उससे जबरन कबूल करवाने के लिए बहुत ज्यादा यातना दी गई। इलाज के दौरान अस्पताल में दिए गए बयान में, मनीष ने बताया कि पुलिस ने उसे बेरहमी से पीटा और उसके प्राइवेट पार्ट्स पर पेट्रोल डाला। उसकी हालत बिगड़ गई और उसे 5 जनवरी को जमानत पर रिहा कर दिया गया, जिसके बाद उसके परिवार ने उसे पहले एक रेफरल अस्पताल और फिर सदर अस्पताल में भर्ती कराया।

जबरन वसूली के आरोप

इस मामले में न सिर्फ यातना बल्कि पीड़ित के परिवार से जबरन वसूली के आरोप भी शामिल हैं। पीड़ित की मां संगीता देवी के अनुसार, मनीष के पिता और पत्नी को भी तीन दिनों तक पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया ताकि उस पर कबूल करने का दबाव बनाया जा सके। उनके घर की तलाशी ली गई, लेकिन कुछ नहीं मिला। पुलिस ने कथित तौर पर मनीष के पिता और पत्नी को छोड़ने के बदले परिवार से 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।

थानेदार सहित 3 निलंबित

पीड़ित की शिकायत के बाद समस्तीपुर SP अरविंद प्रताप सिंह ने जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद, SP ने कड़ी कार्रवाई की और तुरंत तीन पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इनमें तत्कालीन थानेदार शंकर शरण दास, जांच अधिकारी राजवंश कुमार और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल हैं। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

दुकानदार की भूमिका भी जांच के दायरे में

पीड़ित के बयान के आधार पर, दुकानदार जकी अहमद भी शक के दायरे में है। मनीष ने दावा किया कि दुकान मालिक ने पहले उसे पीटा और फिर पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना से पहले, दो अन्य कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। कोई चोरी का सामान बरामद नहीं होने और यातना के आरोप सामने आने के बाद, अब दुकानदार की भूमिका भी जांच के दायरे में है।