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बूंदी में कुंवर वंशवर्धनसिंह की पाग दस्तूर में जालोर में भी खुशियों की सौगात

- बूंदी की पूर्व रियासत का तिलक दस्तूर 2 अप्रेल को, वंशवर्धन जालोर जिले के धनानी के है दामाद

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- बूंदी की पूर्व रियासत का तिलक दस्तूर 2 अप्रेल को, वंशवर्धन जालोर जिले के धनानी के है दामाद

- बूंदी की पूर्व रियासत का तिलक दस्तूर 2 अप्रेल को, वंशवर्धन जालोर जिले के धनानी के है दामाद

जालोर. बूंदी की पूर्व रियासत की पाग का दस्तूर 2 अप्रेल को बूंदी की नवल सागर झील किनारे स्थित मोती महल में सुबह 10 बजे होगा। कापरेन के पूर्व ठिकाने के सदस्य वंशवर्धन सिंह को बूंदी की पूर्व रियासत की पाग बांधी जाएंगी। इस दौरान कोटा पूर्व राजपरिवार के सदस्य इज्यराज सिंह, बूंदी के भानेज कांग्रेस नेता भंवर जितेन्द्र सिंह मौजूद रहेंगे।
तिलक दस्तूर का समस्त आयोजन पूर्व राजपरिवार के मोती महल परिसर में राजपरम्परा के अनुरूप होगा। यहां तिलक दस्तूर की तैयारियां शुरू हो गई। आयोजन को लेकर कई पूर्व रियासत और पूर्व ठिकानों के सदस्यों को आमंत्रित किया है। इसके बाद कुंवर वंधवर्धन सिंह गढ़ पैलेस स्थित रतन दौलत के दरिखाना में आमजन से मिलेंगे। यहां नजर दस्तूर का कार्यक्रम होगा। इसके बाद गढ़ की पड़स से हाथी पर शहर में सवारी निकाली जाएगी। जो प्रमुख मार्गों से होते हुए पुलिस लाइन रोड स्थित केसरी दौलत पहुंचेंगे, यहां नजराना -निछयावर का दस्तूर होगा।

डे्रस कोड में ही प्रवेश
तिलक दस्तूर के कार्यक्रम में पुरुषों को सफेद कपड़े और सिर पर केसरिया पगड़ी बंधी होने पर ही प्रवेश की अनुमति रहेगी। यहां मोती महल में प्रवेश के लिए सुरंग दरवाजे के निकट से प्रवेश की व्यवस्था रहेगी।

12 साल बाद बनी सहमति
बूंदी की पूर्व रियासत के अंतिम सदस्य रणजीत सिंह का वर्ष 2010 में देवलोक गमन हो गया था। सिंह को कोई औलाद नहीं होने से पाग पर कोई फैसला नहीं हुआ था। बूंदी के पूर्व राजघराने से निकट रक्त संबंध होने के नाते कोटा और अलवर दोनों ही पूर्व राजघरानों के सदस्यों ने अब वंशवर्धन सिंह को पाग का हकदार बताते हुए सहमति पत्र जारी किए हैं। इससे पहले कापरेन ठिकाने से ही कर्नल बहादुर सिंह को गोद लिया था।

शहर में होगी सजावट
बूंदी की पूर्व रियासत का इतिहास में नाम रहा। तिलक दस्तूर के आयोजन को भव्यता देने के लिए शहर के प्रमुख मार्गों में सजावट की जाएगी। साथ ही जुलूस में राजसी वैभव की झलक भी दिखाई देगी।