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60:40 अनुपात को नजरअंदाज किया, मनरेगा में रुका भुगतान

जिले की 6 पंचायत समितियों ने नहीं 6 0:40 अनुपात का नहीं रखा ध्यान

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Manrega Latest Postion in Madhya pradesh India satna rewa

Manrega Latest Postion in Madhya pradesh India satna rewa

भीनमाल. महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्यों में श्रम व सामग्री के 6 0:40 रेशियों को नजर अंदाज करना पूरे जिलेभर को भुगतना पड़ रहा है। जिले की छह पंचायत समितियों ने श्रम की बजाए पक्के कार्यों पर अधिक राशि खर्च कर दी। ऐसे में प्रदेशभर के 12 जिलों में सामग्री मद में होने वाले भुगतान को रोक दिया गया है। मनरेगा के वित्तीय सलाहकार राधेश्याम मीणा ने प्रदेश के 12 जिलों में मनरेगा के तहत सामग्री भुगतान पर रोक लगा दी है। ऐसे में जालोर जिले में भी पिछले चार माह से सामग्री का भुगतान अटका हुआ है। मनरेगा के तहत कार्य करने वाले सामग्री आपूर्ति ठेकेदार पंचायत समितियों के चक्कर काट रहे हैं। पिछले चार माह से सामग्री की राशि का भुगतान नहीं हो रहा है। दरअसल, मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों पर 6 0 प्रतिशत श्रम व 40 प्रतिशत सामग्री के रेशियों से कार्य होता है, लेकिन जिले की कई पंचायत समितियों ने 40 प्रतिशत श्रम व 6 0 प्रतिशत सामग्री पर खर्च कर दिए हैं।
इन 6 पंचायत समितियों ने नहीं रखा ध्यान
जिलेभर में आठ पंचायत समितियों में से 6 पंचायत समितियों ने मनरेगा रेशियों को नजरांदाज कर कार्य किए। ऐसे में पूरे जिले के पंचायत समितियों का भुगतान रोक दिया गया। चितलवाना, आहोर, जसवंतपुरा, जालोर, रानीवाड़ा व सायला पंचायत समिति क्षेत्र की ग्रामपंचायतों ने मनरेगा में श्रम व सामग्री के रेशियों का ध्यान नहीं रखा है। ऐसे में भीनमाल व सांचौर में 6 0:40 के तहत कार्य हुए, जबकि इन पंचायत समितियों का भी भुगतान रोक दिया गया।
इन-इन जिलों में रेशियों नहीं रुका भुगतान
जालोर जिले के अलावा, झुंझुनू, बीकानेर , चुरू, नागौर, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, बाड़मेर, पाली व अजमेर में मनरेगा के तहत हुए कार्यों पर 6 0:40 के अनुपात को नजर अंदाज किया। जिस वहज से इन जिलों में सामग्री के पेटे होने वाले भुगतान की राशि पिछले चार माह से अटकी पड़ी है।
श्रम आधारित कार्य शुरू करवाने के निर्देश दिए हैं...
इस वित्तीय वर्ष में जिले भर में सामग्री मद का अनुपात 33 प्रतिशत ही था। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना के तहत पिछले साल में सामग्री के बकाया भुगतान की देयता को भी इस साल में जोड़ दिया है। इस कारण यह समस्या जिले भर में हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए सभी पंचायत समितियों के बीडीओ को श्रम अधारित कार्य अधिक से अधिक शुरू करने के लिए निर्देशित किया गया है। आगामी 15-20 दिनों में अनुपात सहीं हो जाएगा। यह पूरे प्रदेश में 12 जिलों की समस्या है।
- हरिराम मीणा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद-जालोर