
- बालवाड़ा आयुर्वेद अस्पताल के हाल बेहाल, जिम्मेदार बेखबर
जालोर. बालवाड़ा के राजकीय आयुर्वेद अस्पताल में स्टाफ की मनमर्जी भारी है। यहां उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को स्टाफ की अनुपस्थिति में लौटना पड़ता है। सोमवार को इस अस्पताल पर दोपहर 1.30 बजे ताला जड़ा हुआ था। वहीं उपस्थिति के नाम पर वहां एक कागज की पर्ची ब्लेक बोर्ड पर चस्पा थी, जिस पर लिखा हुआ था कि 'मैं आवश्यक कार्य से गांव में जा रहा हूंÓ जिस पर नंबर अंकित थे। इस पर दो तारीख अंकित थी। जिसमें एक 18 जनवरी तो दूसरी 20 जनवरी थी। ग्रामीणों ने बताया कि अक्सर इस अस्पताल में स्टाफ गैर हाजिर ही रहता है। अस्पताल के पास मौजूद कुछ ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल में पहले यह पर्ची 18 जनवरी को चिपकाई गई थी। उसी पर 20 जनवरी की तारीख अंकित कर दी गई। जब पर्ची पर अंकित नंबर पर संपर्क किया गया तो कंपाउंडर अस्पताल पहुंचा। गैर हाजिर रहने की बात पर उसने कहा कि वह तो गांव में ही मौजूद था। अस्पताल पहुंचने के बाद जिस किसी को जरुरत होती है तो वह फोन कर देता है, जिस पर वह अस्पताल पहुंच जाता है। चिकित्सक की उपस्थिति के बारे में उसने कहा कि सवेरे ही वे आकर लौट गए। मामले में चिकित्सक दिनेश जोशी का कहना था कि मैं सवेरे बालवाड़ा अस्पताल आया था, लेकिन अचानक आवश्यक कार्य होने पर मैं निकल गया। पीछे यदि स्टाफ गैर हाजिर है तो कार्रवाई की जाएगी। मामले में खास बात यह है कि मनमर्जी से चल रहे इस अस्पताल में चिकित्सक और कंपाउंडर की अनुपस्थिति में गांव में इस आयुर्वेद चिकित्सालय की उपयोगिता कहां तक सार्थक है।
आरोप: खुद की प्रेक्टिस में व्यस्त
ग्रामीणों ने बताया कि डॉक्टर तो कभी कभार ही आते हैं। वहीं यहां नियुक्त कंपाउंडर रमेश कुमार अस्पताल जरुर पहुंचते हैं, लेकिन यहां उपस्थिति देने की बजाय स्वयं की प्रेक्टिस में ही ज्यादा व्यस्त रहते हैं। ऐसे में स्टाफ की गैर मौजूदगी में यहां अक्सर ताला ही जड़ा रहता है। जिससे मरीजों को उपचार के लिए बाहर ही भटकना पड़ता है और पैसे भी खर्चने पड़ते हैं।
हर गांव में ये हालात
आयुर्वेद अस्पतालों में हालांकि स्टाफ की कमी है और अधिकतर अस्पतालों के चिकित्सकों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। लेकिन इस हकीकत के विपरीत दूसरा पक्ष यह भी है कि अधिकतर अस्पतालों में नियुक्त चिकित्सक और अन्य स्टाफ ड्यूटी टाइम में ही अनुपस्थित रहते हैं। ऐसे ही हाल बालवाड़ा, घाणा, भैंसवाड़ा, आलासन, भोरड़ा, उम्मेदपुर समेत जिले के अन्य आयुर्वेद चिकित्सालयों के है। जहां या तो डॉक्टर नहीं है या जहां है वहां पर वे उपस्थित नहीं रहते। अधिकतर स्थानों पर डॉक्टर ड्यूटी टाइम में अन्यत्र प्रेक्टिस करते हैं। वहीं कंपाउंडर तक भी ड्यूटी टाइम में उपस्थित रही रहते।
इनका कहना
ड्यूटी टाइम में यदि स्टाफ गैर हाजिर रहता है या अन्यत्र ड्यूटी देता है तो नियम विरुद्ध है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अनिल शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी.
Published on:
21 Jan 2020 10:34 am
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