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सडक़ों पर दौड़ रहे मौत के सौदागर, रोकने वाला तक कोई नहीं

देश ही नहीं विदेशों तक अपनी चमक बिखेरने वाले जालोर के ग्रेनाइट उद्योग ने स्थानीय लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी है। प्रतिदिन ग्रेनाइट इकाइयों तक विभिन्न रास्तों से पहुंच रहे ग्रेनाइट ब्लॉक हादसे का कारण बन रहे हैं। शहर के बीच ओवरलोड गुजर रहे इन टे्रलर से संभावित हादसों का मामला रेवदर-जसवंतपुरा टोल रोड पर जीरावला के निकट गुरुवार देर रात के हादसे के बाद एक बार फिर से गंभीरता दर्शा रहा है।

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सडक़ों पर दौड़ रहे मौत के सौदागर, रोकने वाला तक कोई नहीं

granite block Droped on car

केस-1
2 दिसंबर को आहोर- माधोपुरा के निकट टे्रलर से ग्रेनाइट ब्लॉक मार्ग पर गिर गया था। जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
केस-2
3 नवंबर को आहोर-जालोर मार्ग पर भी टे्रलर से गे्रनाइट ब्लॉक गिर गया था। इस हादसे में भी गनीमत नहीं कि कोई चपेट में नहीं आया
केस-3
28 जुलाई और 7 अगस्त को आहोर-तखतगढ़ रोड पर चरली के निकट ग्रेनाइट ब्लॉक गिरे, रास्ता अवरुद्ध हुआ, आहोर तालाब के निकट मोड़ पर भी ब्लॉक गिरे
खुशालसिंह भाटी.जालोर. देश ही नहीं विदेशों तक अपनी चमक बिखेरने वाले ग्रेनाइट उद्योग ने स्थानीय लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी है। प्रतिदिन ग्रेनाइट इकाइयों तक विभिन्न रास्तों से पहुंच रहे ग्रेनाइट ब्लॉक हादसे का कारण बन रहे हैं। शहर के बीच ओवरलोड गुजर रहे इन टे्रलर से संभावित हादसों का मामला रेवदर-जसवंतपुरा टोल रोड पर जीरावला के निकट गुरुवार देर रात के हादसे के बाद एक बार फिर से गंभीरता दर्शा रहा है। इस हादसे में बिना से टी ओवरलोड टे्रलर से एक ग्रेनाइट ब्लॉक पास से गुजर रही कार पर गिर गया। यह टे्रेलर दांतराई से आबूरोड जा रहा था। इस कार में 7 लोग सवार थे। गनीमत रही मौत का सामना करने के बावजूद कोई जन हानि इस हादसे में नहीं हुई। हादसे में एक सवार को हलकी चोटेें आई है। घायल रानीवाड़ा क्षेत्र के मालवाड़ा के बताए जा रहे हैं। हैड कांस्टेबल रमेश दान ने बताया कि कार सवार माउंट आबू घूमने गए थे, जो रेवदर से मालवाड़ा (रानीवाड़ा) आ रहे थे। (एसं)
इस तरह समझें बेपरवाही
जालोर में 1300 से अधिक ग्रेनाइट यूनिट है और यहां प्रतिदिन स्थानीय माइंस से धवला समेत अन्य क्षेत्रों और अन्य जिलों से ग्रेनाइट के बड़े बड़े ब्लॉक टे्रलर के माध्यम से ग्रेनाइट इकाइयों तक पहुंचते हैं। इन ट्रेलर पर रखे पत्थरों पर से टी रेलिंग तक नहीं होती। जिसका नतीजा यह होता है कि अक्सर ये पत्थर ट्रेलर गिरते रहते हैं और आजन के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। मामला इसलिए खास है कि पिछले छह माह में 4 बार ग्रेनाइट ब्लॉक टे्रलर से गिर चुके हैं। सीधे तौर पर यह बड़े हादसे की आहट है। लेकिन इस मामले में जि ोदार अधिकारी और जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। जालोर-सिरोही सीमा पर घटित इस हादसे ने गंभीर हादसे की आहट दे दी है।
इसलिए खतरा
ट्रेलर से ग्रेनाइट ब्लॉक जालोर शहर के भीतर से गुजरते हैं। जालोर शहर में कहने को एक बाइपास है, लेकिन यह भी आबादी क्षेत्र के भीतर से ही गुजरता है। सीधे तौर पर बिशनगढ़ से थर्ड फेज जाने या उधर से इस मार्ग तक जाने के लिए भी भीनमाल बाइपास, नया बस स्टैंड क्षेत्र के आस पास का आबादी क्षेत्र होकर ही ग्रेनाइट ब्लॉक से भरे ओवरलोड टे्रलर बिना सुरक्षा मानकों के यहां से गुजरते हैं। सीधे तौर पर यह हादसे को न्योता है। इधर, औद्योगिक क्षेत्र तृतीय चरण तक पहुंचने से पहले इसी मार्ग पर जि ोदार महकमा भी है, लेकिन जि ोदार इस गंभीर मामले को नजर अंदाज कर रहे हैं।
हर मार्ग असुरक्षित, सांसत में जान
पिछले एक साल की बात करें तो दर्जनभर हादसे ग्रेनाइट ब्लॉक से जुड़े हैं। बिना सुरक्षा मानक चल रहे इन टे्रलरों से ग्रेनाइट ब्लॉक गिरने का क्रम आज भी जारी है। सीधे तौर पर ग्रेनाइट इकाइयों तक जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर मार्ग, उम्मेेदपुर मार्ग, कलापुरा-डकातरा मार्ग, रामसीन मार्ग होते हुए ग्रेनाइट ब्लॉक पहुंचते हैं और लगभग सभी मार्गों पर पत्थर गिरने की पुनरावृत्ति हो रही है। ये हालात विभागीय लापरवाही तो उजागर कर ही रही हैं। साथ ही लोगों की जान में सांसत में डाल रहे हंै।
इनका कहना
ओवरलोड और अवैध वाहनों पर नकेल कसेल के लिए स्पेशल टास्क फोर्स मुस्तैद है। इसके बाद भी बिना सुरक्षा मानकों के ओवरलोड वाहन चल रहे हैं तो विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
- देवीचंद ढाका, जिला परिवहन अधिकारी, जालोर