
Problem in Kukadiya Village
हाड़ेचा. सौ में से सत्तर आदमी फिलहाल जब नाशाद हैं, दिल पर हाथ रखकर कहिये, देश क्या आजाद है, बंगलों और कोठियों से देश के मैयार को मत आंकिये, असली हिन्दुस्तान तो अब भी खुले में आबाद है...। बंगलों और कोठियों से देश के मैयार को मत आंकिये, असली हिन्दुस्तान तो अब भी खुले में आबाद है...। किसी शायर की यह पंक्तियां नेहड़ के सीमांत गांव में बसे लोगों पर सटीक बैठती है। नेहड़ के गुजरात व पाकिस्तान की सीमा से सटे गांवों में आज भी लोग गर्मी, सर्दी व बरसात में खुले में जीवनयापन करने को मजबूर है। हम बात कर रहे हैं नेहड़ के सीमांत गांव जारोदर ग्राम पंचायत के कुकडिय़ा गांव की। गांव के अधिकतर लोगों के पास रहने को आशियाने नहीं है।
प्यास बुझाने के लिए लोगों को कच्ची बेरियों पर घंटों इंतजार के बाद आधे दिन में एक घड़ा पानी नसीब हो पाता है। गांव की जनसंख्या 2011 की जनगणना के तहत 788 है, लेकिन आज भी यहां के लोगों को पीने का पानी, ढाणियों में बिजली, ग्रेवल सड़क, रोजगार , सीसी सड़कें और जीएलआर में पानी नसीब नहीं हो पाया है।
एक मटके पानी के लिए घंटों तक इंतजार...
यहां की महिलाओं को कुकडिय़ा से पांच किमी पैदल दूरी तय कर कच्ची बेरियों से आधा दिन इंतजार के बाद एक घड़ा पानी नसीब हो पाता है। ग्रामीण प्रभुराम ने बताया कि पानी का कोईस्रोत नहीं होने से ग्रामीण कच्ची बेरियों पर निर्भर हैं। एक बेरी से तीन सौ घरों में बारी-बांधकर पानी दिया जाता है। ऐसे में गर्मी के दिनों में लोगों को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
अंधेरे में बिताते हैं राते...
यहां के अधिकतर लोग ढाणियों में बसे हुए हैं। केवल दस-बीस घरों में बिजली के कनेक्शन हैं। ग्रामीण रिड़मलराम कोली ने बताया कि ढाणियां होने की वजह से लोगों को बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा रहा है। हालांकि कई घरों के लिए डिस्कॉम ने एस्टीमेंट बनाए हैं, लेकिन अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं हो पाए हैं। यहां की नब्बे फीसदी आबादी निरक्षर होने के कारण ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। गौरतलब है कि इस गांव को सांचौर विधायक ने गोद भी ले रखा था, लेकिन गुजरात व रणखार से सटे इस गांव के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से मोहताज है। यहां पानी, बिजली, परिवहन व रोजगार के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत की मानें तो विधायक की ओर से गांव के विकास के लिए कई प्लान प्रस्तावित किए हैं, लेकिन बजट के नाम पर आज तक एक रुपया भी नहीं आया है।
पंचायत जाने में रपट बनी परेशानी...
जोरादर ग्राम पंचायत से कुकडिय़ा जाने वाली सड़क पर बनी रपट बाढ़ के दौरान टूट गई थी। ऐसे में यह रास्ता बाढ़ के बाद से अवरुद्ध है। बीते पांच माह से ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद यह रपट नहीं सुधर पाई है। जिसके कारण गांव में पीएम आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए सामग्री लाने में भी ग्रामीणों को समस्या हो रही है। कई घरों की नींव तक नहीं रखी जा सकी है। ग्राम पंचायत स्थर पर समस्या समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन समस्याओं के अम्बार के चलते ग्रामीणों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
प्रयास कर रहे हैं...
&बाढ़ के चलते कई रपटें टूट चुकी हैं। जिन्हें सुधारने के लिए पीडब्ल्यूडी को अवगत करवाया गया है।अधिकतर घरों में बिजली कनेक्शन करवाए गए हैं। ग्राम पंचायत की बैठक में पीडब्ल्यूडी, जलदाय, बिजली व परिवहन सहित अन्य विभागों से संबंधित समस्याओं को लेकर प्रस्ताव लिया जाएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाया जाएगा। वैसे विधायक मद से एक रुपया भी ग्राम पंचायत में विकास के लिए नहीं मिला है।
-प्रकाश सैनी, ग्रामसेवक, जोरादर
सीमांत क्षेत्र की ग्राम पंचायत होने के साथ विधायक द्वारा गांव को गोद लेने के बावजूद अतिरिक्त बजट नहीं मिला है। गांव में आज भी पानी, सड़क व बिजली सहित कई समस्याएं हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका निपटारा किया जा रहा है।
- चन्द्राकंवर, सरपंच, ग्राम पंचायत जोरादर
Published on:
07 Jan 2018 12:35 pm
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