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अनदेखी से बदहाली में जी रहे हैं डेडियावांगा के ग्रामीण

ग्रामीण बोले जनप्रतिनिधि चुनाव में वोट मांगने आते हैं, लेकिन समस्या समाधान नहीं करते

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Dediyawanga Town

Dediyawanga Town

हाड़ेचा. नेहड़ के सीमांत सूथड़ी ग्राम पंचायत के डेडियावांगा गांव में मूलभूत सुविधाओं का आज भी इंतजार है। ग्रामीणों का कहना है नेता वोट मांगने आते हैं, लेकिन गांव के हाल सुधारने के लिए किसी ने रुचि नहीं ली है। बाढ़ के दौरान रास्ता भी बंद हो गया, जिसके बाद गांव टापू बन गया, लेकिन उसके बाद भी प्रशासन ने गांव की सुध नहीं ली है। ग्रामीणों ने बताया कि साकरिया गांव से 2008 में राजस्व गांव का निर्माण हुआ, जिसमें करीब सात सौ से भी अधिक आबाद है, लेकिन उसके बाद भी परिवहन सुविधा, सड़क, विद्युत, शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल स्रोत भी नहीं है। हालांकि ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया, लेकिन उसके बाद भी गांव में जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है।
साकरिया क्रास बांध टूटा, गांव का रास्ता बंद...
बाढ़ के दौरान डेडियावांगा जाने के लिए साकरिया क्रास बांध पर ग्रेवल सड़क बनवाई है। इससे ग्रामीण गांव तक पहुंचते हैं। परन्तु क्रास बांध टूटने के बाद गांव के सभी रास्ते बंद हो गए। रास्ते के लिए ग्रामीण कईबार गुहार कर चुके हैं।
ग्रामीणों ने निजी खर्च पर बनवाया पुल
इधर गांव में जाने के लिए ग्रामीण खुद के खर्च से लूनी नदी को पार करने के लिए बबूलों को डालकर छोटे-छोट पाइपों को खुद के खर्च से पुलिया बनाकर कच्चा रास्ता बनवाया। इससे रास्ता पार कर लोग गांवों में पहुंचते हैं।
शिक्षक नहीं आते, स्कुल हुआ बंद
हालांकि डेडियावांगा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय बना हुआ है, लेकिन यहां कार्यरत शिक्षक विद्यालय ही नहीं आते थे। यहां के छात्रों का नामांकन कम हो गया, इससे यह स्कूल बंद हो गया।सात सौ से अधिक आबादी का गांव है, लेकिन उसके बाद भी विद्यालय बंद होने से पांच किलोमीटर दूर साकरिया विद्यालय में छात्रों को अध्ययन करने जाना पड़ रहा है।
स्वीकृति हुई, लेकिन बनवाई नहीं
डेडियावांगा गांव में जाने के लिए एक किलोमिटर डामरीकरण सड़क की स्वीकृति हुई, लेकिन ठेकेदार की ओर से बीच में ही कार्य को छोड़ दिया जिसके चलते रास्ता भी नही हुआ है, ऐसे में ग्रामीणों को भारी वाहन ले जाने के साथ आवागमन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इनका कहना है...
गांव में विद्युत, परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा का अभाव है, कई बार प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों को अवगत करवाया, लेकिन उसके बाद भी समस्या का समाधान नही हुआ है।
-लीला भारती, ग्रामीण
बिजली सहित अन्य सभी सुविधाओं का अभाव है। क्रांस बांध टूटने पर खुद के खर्च से लूनी नदी के बहाव में रास्ता बनवाया। अब तक कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
-तालबखान, ग्रामीण
नौ साल पूर्व राजस्व गांव बना है, लेकिन गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों विद्युतीकरण, डामरीकरण सहित सुविधाओं का इंतजार है।
-नसरीन बानो, सरपंच, संूथड़ी