
- शिक्षकों की मेहनत से चमन हुआ आलमजी का धोरा
बागोड़ा. जैसावास का राजकीय विद्यालय दूसरे सरकारी विद्यालयों के लिए सकारात्मक संदेश दे रहा है। आलमजी का धोरा स्थित सरकारी स्कूल आज सुविधा, संसाधनों और बेहतर शैक्षणिक माहौल में किसी निजी विद्यालय से कम नहीं है। स्कूल प्रशासन की पहल और विद्यार्थियों की मेहनत से यह संभव हो पाया है। उपखंड मुख्यालय से मात्र 8 किमी की दूरी पर स्थित इस विद्यालय के शिक्षकों ने कोरोना काल में समय का सदुपयोग कर न केवल विद्यालय की सूरत बदली, बल्कि उसके बाद विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक माहौल भी तैयार किया। प्रधानाध्यापक मनोहर लाल बिश्नोई के प्रयास से स्कूल की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वहीं बच्चों को पढ़ाई भी प्रोजेक्टर से करवाई जा रही है।
ग्राउंड में बना है सौर मंडल व एबीसीडी गार्डन
धौरे पर स्थित इस विद्यालय के अंदर प्रवेश करते ही ग्राउंड में बना सौर मंडल व एबीसीडी गार्डन छोटे बच्चों को प्रयोगिक व व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। बच्चों को खेल खेल में पढ़ाई करवाने के उद्देश्य से विद्यालय स्टाफ ने सौर मंडल व एबीसीडी गार्डन बनाया है। सौर मंडल में सभी अलग अलग ग्रह को दर्शाया गया है। एबीसीडी गार्डन में ए से लगाकर जेड तक वर्ड अंकित है।
हरा भरा बगीचा बढ़ा रहा रुचि
विद्यालय स्टाफ ने मेहनत कर विद्यालय मैदान में हरी भरी घास उगाई है। शिक्षकों ने फलदार व फूलदार पौधे उगाकर बगीचा विकसित किया है। जिसमें हर किस्म के हरे पौधे लगे हुए है। बेहतर माहौल के बीच अभिभावकों का इस स्कूल के प्रति रुझान भी बढ़ रहा है। वर्तमान में आवाजाही के संसाधनों के अभाव के बावजूद इस विद्यालय में 300 के करीब नामांकन है।
थोड़ा प्रयास हो तो बेहतर परिणाम
यह विद्यालय 1998 में स्थापित हुआ था तो स्कूल तक पहुंचने को रास्ता नहीं था। वर्तमान में शिक्षकों के प्रयास से आवाजाही लायक रास्ता है। अब इस विद्यालय के लिए थोड़ा प्रयास कर पक्की सडक़ का निर्माण करवाया जाए तो स्थिति में और सुधार हो जाएगा।
Published on:
21 Jul 2022 09:11 pm
बड़ी खबरें
View Allजालोर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
