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जालोर

यहां सरकारी जमीन पर नजरें गढ़ाए बैठे हैं अतिक्रमी

खसरा नंबर 3942 में नगरपालिका बोर्ड की ओर से सालों पहले जलदाय विभाग को वाटर स्कीम के तहत भूमि का आवंटन किया गया था

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जालोर. शहर समेत जिले भर में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमी नजरें गढ़ाए बैठे हैं। ऐसा ही एक मामला शहर से सटी सीमा में सामने आया है। जहां जलदाय विभाग को राज्य सरकार की ओर से आवंटित सरकारी जमीन पर कुछ अतिक्रमियों ने श्मशान बनाने के लिए कब्जा करने का प्रयास किया, लेकिन विभागीय अधिकारियों की सजगता के कारण यह जमीन अतिक्रमण की जद में आने से बच गई।
जानकारी के अनुसार शहर के निकट जालोर बी के खसरा नंबर ३९४२ में नगरपालिका बोर्ड की ओर से सालों पहले जलदाय विभाग को वाटर स्कीम के तहत भूमि का आवंटन किया गया था। इस भूमि पर जलदाय विभाग के स्रोत होने के साथ साथ पानी की टंकी भी बनी हुई है। इसके बावजूद कुछ लोगों ने यहां श्मशान बनाने के लिए अतिक्रमण करने का प्रयास किया। ऐसे में जलदाय विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक लगने पर उन्होंने तहसीलदार को पत्र लिखकर अतिक्रमियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और भविष्य में किसी व्यक्ति विशेष को यह जमीन आवंटित नहीं करने की बात कही।
यहां से होती सप्लाई
जलदाय विभाग की ओर से तहसीलदार को लिखे गए पत्र में बताया गया कि जिस जमीन पर श्मशान बनाने के लिए अतिक्रमण का प्रयास किया जा रहा है, वहां से पूर्व में जालोर शहर व आस पास के गांवों में पेयजल सप्लाई की जाती थी। वहीं इस जमीन पर मौजूदा समय में भी विभाग के पेयजल स्रोत व टंकी बनी हुई है।
जमाबंदी में भी उल्लेख
गौरतलब है कि जलदाय विभाग की जिस जमीन पर लोगों की ओर से अतिक्रमण किया जा रहा था, उस जमीन का उल्लेख जमाबंदी में भी हो रखा है। तहसील कार्यालय में मौजूद जमाबंदी के अनुसार ३९४२ खसरा नंबर में 2.5500 हैक्टेयर गैर मुमकिन जमीन वाटर स्कीम के नाम से दर्ज है।
आसपास के लोगों ने जताई आपत्ति
जालोर बी में स्थित जलदाय विभाग की इस जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर आस पास रहने वाले लोगों ने भी आपत्ति जताई। वहीं इसकी सूचना विभागीय अधिकारियों को दी। इसके बाद इस जमीन को अतिक्रमण की भेंट चढऩे से बचाया जा सका।
अतिक्रमण रुकवाया…
जालोर बी के खसरा नंबर ३९४२ में जलदाय विभाग का स्रोत और टंकी है। जहां कुछ लोग श्मशान बनाने के लिए अतिक्रमण कर रहे थे। इस पर विभाग ने तहसीलदार को अवगत कराते हुए अतिक्रमण रुकवाया है। साथ ही इस तरह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी लिखा है।
– जितेंद्र त्रिवेदी, एईएन, पीएचईडी, जालोर