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जालोर: भवातड़ा में बनने वाला है बंदरगाह, लेकिन अभी यह अड़चन

- भवातड़ा में बंदरगाह के लिए हो चुका है सर्वे और डीपीआर भी बनी, अब तक केंद्र सरकार से नहीं मिली वित्तीय स्वीकृत

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- भवातड़ा में बंदरगाह के लिए हो चुका है सर्वे और डीपीआर भी बनी, अब तक केंद्र सरकार से नहीं मिली वित्तीय स्वीकृत

जालोर. राजस्थान राज्य ही नहीं देश की अर्थव्यवस्था के लिए भविष्य में मील का पत्थर साबित होने वाला सांचौर का भवातड़ा स्थित इनलैंड पोर्ट अभी कागजों में दफन है। यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट राजस्थान के गुजरात से सटते इस क्षेत्र में जल मार्ग से अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला है। इसी मंशा से केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को खासी अहमियत दी और उसके बाद जून 2016 में इस प्रोजेक्ट के लिए धरातल पर सर्वे का काम शुरू हुआ, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को तीन वर्ष हो चुके हैं और इन तीन सालों में इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली एजेंसी वेपकॉस ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व डीपीआर बनाकर जल संसाधन विभाग को भी सुपुर्द कर दी थी। यह प्रोजेक्ट 6 हजार 200 करोड़ रुपए का आंका गया था। राज्य स्तरीय क्वेरी होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन उसके बाद अब तक इस प्रोजेक्ट पर वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है।
बंदगाह के लिए क्षेत्र भी चिह्नित
भवातड़ा पोर्ट के लिए इस क्षेत्र में 1.72 स्क्वायर किमी (172 हैक्टेयर) पोर्ट के लिए क्षेत्र चिह्नित किया गया था। जिसमें पहले स्तर पर 35 से 40 हैक्टेयर क्षेत्र का उपयोग बंदगाह के लिए किया जाना था और शेष क्षेत्र आरक्षित रखा जाना था।
प्रोजेक्ट में इन बिंदुओं पर था फोकस
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में 365 किमी लंबी केनाल बनाई जानी है। सीधे तौर पर यह समुद्री मार्ग ही होगा। प्रोजेक्ट में 34२ किमी हिस्सा राजस्थान में तथा 23 किमी क्षेत्र राजस्थान का है। भवातड़ा में अंतरदेशीय बंदरगाह का प्रोजेक्ट बहुआयामी है। यह केवल राजस्थान को नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हितों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई गई है। भविष्य में इसकी क्रियान्विति होती है तो बहुआयामी विकास होगा। समुद्र से पोर्ट तक 60 मीटर चौड़ाई की केनाल बनाई जानी प्रस्तावित है। जिसकी गहराई 3 मीटर के लगभग रहनी है। इस मार्ग से बड़े बड़े जहाज भवातड़ा पहुंचने हैं और यहां लोडिंग और लनलोडिंग का बड़े स्तर पर काम होना है। सीधे तौर पर राजस्थान को व्यापारिक दृष्टि से समुद्री मार्ग से जोडऩे का यह प्रमुख मार्ग बनना है। प्रोजेक्ट इतना महत्वपूर्ण और बहुआयामी होने के बाद भी आखिर स्तर पर केंद्र सरकार के पास ही अटका पड़ा है। केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय स्वीकृति जारी हो जाए तो जालोर को व्यापारिक श्रेणी में नई पहचान मिलेगी।
ऐसे बनना है यह समुद्री मार्ग
जालोर का यह पोर्ट विभिन्न धरातलीय आंकलन के बाद कागजी स्तर पर स्वीकृत हुआ है और उसके बाद इसकी डीपीआर बनी। इस प्रोजेक्ट से जालोर देश के हर समुद्री मार्ग से सीधे तौर पर जुड़ेगा। समुद्री मार्ग के लिए भवातड़ा से 365 किमी लंबी 60 मीटर चौड़ी नहर बननी है। यह नहर कोरी क्रीक से कच्छ का रण होते हुए भवातड़ा पहुंचेगी।
पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए बिजनेस हब
प्रोजेक्ट खासा महत्वपूर्ण है और इससे पूरे पश्चिमी राजस्थान को फायदा होना है। मुख्य रूप से जालोर समेत जोधपुर, बाड़मेर जिले को इससे फायदा होना है। इसके अलावा प्रोजेक्ट मैप के अनुसार भवातड़ा से 144 किमी दूरी से दिल्ली-मुंबई (वाया पिंडवाड़ा-आबूरोड) फ्रेट कोरिडोर भी गुजर रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों के लिए भी यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण साबित होगा।
ऐसे चर्चा में आया था यह प्रोजेक्ट
वर्ष 2015 में तत्कालीन मंत्री रामप्रताप चौधरी व सचिव अजिताभ शर्मा ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री नितीन गड़करी से इस प्रोजेक्ट को लेकर चर्चा की थी और प्रोजेक्ट की अहमियत से अवगत करवाया था। जिस पर इस प्रोजेक्ट को परमिशन मिली और स्वेज नहर की तर्ज पर इसके लिए सर्वे होने के साथ साथ डीपीआर भी बनी।
50 हजार तक रोजगार का सृजन
भविष्य में भवातड़ा में पोर्ट बनने से रोजगार के अवसर मिलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार 50 हजार युवाओं को यहां रोजगार मिलेगा। साथ ही प्रोजेक्ट से स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगा। वहीं रेलवे और अन्य ट्रांसपोर्टेशन के संसाधनों पर बोझ कम होगा और जिले, राज्य और देश का व्यापार अंतरराष्ट्रीय व्यापार से भी कनेक्ट हो जाएगा।
भविष्य के लिए दिए सुझाव, पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
वेपकॉस ने भवातड़ा में प्रस्तावित इस इनलैंडपोर्ट के लिए भविष्य की योजनाओं पर फोकस किया है। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में वर्ष 2019 से 2028 तक के दशक के लिए 35 हैक्टेयर भूमि की जरुरत जताई गई। वहीं दूसरा चरण 2029 से 2038 तक है। इसके लिए 53 हैक्टेयर भूमि की जरुरत जताई गई।
इनका कहना
विभागीय स्तर पर सर्वे रिपोर्ट सर्वे कर दी गई थी और मुख्यालय से भारत सरकार को रिपोर्ट भेजी गई थी। उसके बाद अग्रिम आदेश प्राप्त नहीं हुए है। हालांकि नई सरकार बनने के बाद फिर से प्रोजेक्ट को लेकर मुख्यालय स्तर पर प्रोजेक्ट क्वेरी हो रही है।
- आरके भाटी, एक्सईएन, जल संसाधन, जालोर