
भीनमाल, सांचौर व पाली में मिट्टी जांच प्रयोगशाला बंद, किसान होते है परेशान
भीनमाल. जिलेभर के किसानों को अपने खेत-खलिहानों के मिट्टी की जांच करवानी है, तो उन्हें पाली शहर तक का सफर करना पड़ता है। प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य योजना के तहत खेतों के मिट्टी की जांच कर जमीन की उर्वरा शक्ति को जानने के लिए यहां कृषि विस्तार कार्यालय में तीन साल पूर्व शुरू हुई मृदा जांच प्रयोगशाला बंद है। इसके अलावा जिले के सांचौर व जालोर में भी मिट्टी जांच प्रयोगशाला बंद होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। करीब डेढ़ साल से यहां लेब में ताला लगा हुआ है। ऐसे में जिलेभर के किसानों को अपने खेत-खलिहानों के जमीन की उर्वरा शक्ति व पोषक तत्वों के कमी की जानकारी के लिए मिट्टी व पानी की जांच के लिए सैम्पल लेकर पाली लेब में पहुंचाना पड़ रहा है। यहां पर लेब पीपीपी मॉडल पर चल रही थी। यहां पर लेब में मिट्टी जांच अधिकारी का भी स्थानांतरण हो चुका है। इसके अलावा लेब पर स्टाफ भी नहीं है। यहां पर एक साल पूर्व मिट्टी के करीब 5 हजार सैम्पल की जांच हुई थी, लेकिन यहां पर लेब बंद होने के साथ ही किसानों की अरमान भी मिट्टी में मिल रहे हंै। किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने का दावा कर रही है, लेकिन संसाधन उपलब्ध नहीं होते है। कृषि विस्तार विभाग की ओर से किसानों के मिट्टी की जांच कर जमीन की उर्वरा शक्ति व पोषक तत्वों के कमी के बारे में सोयल हैल्थ कार्ड वितरण किए जाते हैं।
पांच रुपए में होती है जांच
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना फरवरी 2015 में भारत सरकार ने शुरू की थी, किसान लेब में 5 रुपए में लेब में मिट्टी की जांच करवा सकते है। जिससे किसानों को उनके खेत की जमीन की उर्वरा शक्ति व पोषक तत्वों की कमी के बारे में जानकारी मिल सके। किसान जमीन में पोषक तत्वों की पूर्ति कर उसे जमीन को भरपूर उपजाऊ बना सके। किसान को मिट्टी की गुणवत्ता का अध्ययन करके एक अच्छी फसल प्राप्त करने में सहायता मिल सके। साल के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होती है मिट्टी, यदि मिट्टी की क्वालिटी ही सही नहीं होगी तो फसल भी सही से नहीं होगी।
एक बार लग चुकी है आग
यहां कृषि विस्तार कार्यालय में लगी मिट्टी जांच प्रयोगशाला में अप्रेल 2017 में आग भी लग चुकी है। ऐसे में एक मशीन को नुकसान पहुंचा था। लेब बंद होने से यहां पर हजारों रुपए की लाग से लगे उपकरण भी बेकार हो रहे है। यहां पर कार्यरत जांच अधिकारियों का भी अन्यत्र जिलों में स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में किसानों के कल्याण की महत्ती योजना महज कागजों में ही सफर कर रही है।
नहीं हो पाती है जांच
किसान पूर्व में यहां लेब में मिट्टी जांच प्रयोगशाला में मिट्टी की जांच करवा सकते थे, लेकिन सालभर से लेब बंद होने से समस्या है। किसानों को जमीन की उर्वरा शक्ति का ज्ञान नहीं मिलता है।
- नारायणलाल, किसान
पूर्व में जिले के भीनमाल, सांचौर व जालोर में मिट्टी जांच के लिए लेब थी, लेकिन स्टाफ नहीं होने से लेब बंद है। यहां पर लेब पीपीपी मोडल पर चल रही थी, लेब का स्टाफ भी नहीं है।
- डॉ. आरबी सिंह, उप निदेशक कृषि विस्तार विभाग-जालोर
Published on:
25 Dec 2019 09:47 am
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