
आफरी (शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर) के दल ने जालोर वन विभाग की टीम के साथ 4 रेन्ज का निरीक्षण किया, चल रहा डीपीआर के लिए काम
खुशालसिंह भाटी
जालोर. नदियों के संरक्षण और उनके मूल रूप को बरकरार रखने के लिए बड़े स्तर पर पहल शुरू की गई है. राजस्थान और भारत सरकार की ओर से इस पहल के तहत लूणी नदी के प्राकृतिक रूप को बनाए रखने के लिए वर्तमान में कार्य करवाया जा रहा है. आफरी (शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर) की ओर से हाल ही में जालोर जिले में लूणी के बहाव क्षेत्र और उसकी सहायक नदियों को विकसित करने के लिए डीपीआर पर कार्य शुरू किया गया है. जोधपुर से जालोर आई टीम ने 5 दिन तक जालोर जिले के एरिया का निरीक्षण किया. वही टीम ने लूनी नदी और उसके आसपास के क्षेत्र साथ ही इसकी सहायक नदियां जवाई, बांडी, सुकड़ी समेत अन्य नदी नालों का सर्वे कर उन्हें रिकॉर्ड में दर्ज किया है. यह वह नदी नाले हैं जिनका पानी किसी ना किसी रूप में लूनी तक पहुंचता है विभागीय जानकारी के अनुसार सरकार की मंशा है कि नदियों को उनके प्राकृतिक और मूल रूप में लाया जाये. इस कार्य के तहत लूनी नदी के मुख्य बहाव क्षेत्र के आस पास 5-5 किलोमीटर के दायरे को विकसित किया जाना है. जिसमें पेड़ पौधे लगाने, वनस्पतियों को विकसित करने का कार्य भी किया जाएगा. इसके अलावा वन्य जीवों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और इसके लिए कार्य किए जाएंगे. वहीं इसकी सहायक नदियां भी विकसित की जानी है. इन नदियों के आसपास के 2 किलोमीटर के दायरे को विकसित कर यहां पेड़ पौधे लगाए जाने है साथ ही उनके प्राकृतिक रूप को बरकरार करने के लिए कार्य किया जाना है जोधपुर की टीम ने इसके लिए जिले का सर्वे किया है जालौर में वन विभाग की 4 रेन्ज जालोर,जसवंतपुरा, रानीवाड़ा और भीनमाल का टीम ने सर्वे कर यहां के क्षेत्रों से गुजरने वाले नदी नालों को रिपोर्ट में दर्ज किया है आ?री और वन विभाग की टीम ने जिले की चारों रेन्ज में 40 से 50 स्थानों को चिन्हित कर संग्रहित किया है.
8 जिलों से जुड़ा है मामला
लूणी का विस्तृत बहाव क्षेत्र है यह 8 जिलों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ मामला है प्रोजेक्ट के तहत अजमेर, नागौर, राजसमंद, पाली, उदयपुर, सिरोही, बाड़मेर व जालौर जिले में इस नदी के बहाव क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों को चिन्हित कर इन्हें विकसित किया जाना है यहां प्लांटेशन भी होना है इसके अलावा अनावश्यक अंग्रेजी बबूल को हटाने के साथ जीव जंतुओं के संरक्षण का कार्य भी होना है प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य नदी को उसके वास्तविक रूप में लाने के साथ-साथ उसके बहाव क्षेत्र को प्राकृतिक रूप देने और नदी को संरक्षित करने का है इस नदी का राजस्थान में लगभग 511 किलोमीटर कहां बहाव क्षेत्र है इस क्षेत्र में डीपीआर के तहत क्षेत्रों को चिन्हित कर उन्हें डेवलप किया जाएगा
सर्वे किया
& लूणी और इससे जुड़ी सहायक नदियों के डवलपमेंट के लिए डीपीआर का काम चल रहा है टीम ने जालोर जिले में भी इसके लिए सर्वे किया है।
-केआर चौधरी, मुख्य तकनीकी अधिकारी, आफरी
Published on:
29 Nov 2019 10:07 am
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