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पश्चिमी राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट:: अनुबंध नहीं होने से प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट का अटका काम

तय अवधि गुजरने के बाद भी कागजों में अटका सर्वे, विभाग का कहना एजेंसी ने नहीं किया अनुबंध, एजेंसी का कहना हमारे डाटा तैयार

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पश्चिमी राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट:: अनुबंध नहीं होने से प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट का अटका काम

पश्चिमी राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट:: अनुबंध नहीं होने से प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट का अटका काम

जालोर. माही परियोजना से पश्चिमी राजस्थान के जालोर, बाड़मेर जिलों को लाभान्वित करने वाले बहुआयामी प्रोजेक्ट कागजों में दम तोड़ रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए बजट आवंटित किया गया था, जिसके बाद इस प्रोजेक्ट के लिए वेपकॉस को एक माह के भीतर काम पूरा करना था। तय तिथि 2 सितंबर 2023 से 16 अक्टूबर 2023 निर्धारित की गई थी। इस मामले में जल संसाधन विभाग जालोर की ओर से 11 मार्च 2024 को रिमाइंडर लेटर एसई जल संसाधन वृत्त जोधपुर को भेजा गया है। जिसमें बताया गया है कि एजेंसी को बार बार अवगत करवाने के बावजूद भी कार्य का अनुबंध गठित नहीं किया गया है और कार्यादेश अनुसार निर्धारित कार्य पूर्णता तिथि व्यतीत हो चुकी है। बता दें प्रोजेक्ट की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने में हो रही देरी के संबंध में राजस्थान किसान संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक विक्रमसिंह पूनासा, प्रदेशाध्यक्ष बद्रीदान नरपुरा ने 13 मार्च को मुख्य अभियंता रिवर बेसन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण जयपुर विनोद चौधरी से मुलाकात की। जिसमें अधिकारी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

एजेंसी का कहना हम तो तैयार

वेस्टर्न राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट के संबंध में 28 फरवरी 2024 को जवाबी पत्र वेपकॉस के परियोजना प्रबंधक आरकेसिंह ने जल संसाधन विभाग जोधपुर को पत्र लिखा है, जिसमें बताया कि मुख्य अभियंता के द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार हमने परियोजना का कार्य शुरु कर दिया था एवं डाटा भी एकत्रित कर लिया था। परंतु अनुबंध न होने के कारण कार्य शुरु नहीं हो पाया था।

यह है प्रोजेक्ट- जो भविष्य से जुड़ा

पश्चिमी राजस्थान नहर परियोजना के तहत माही बेसिन के जल को जालोर एवं बाड़मेर जिले तक पहुंचाया जाना है। 15 टीएमसी पानी का उपयोग लिफ्ट एवं फ्लो द्वारा फव्वारा पद्धति से लगभग 25 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को सिंचित किया जाना है।- माही नदी बेसिन के जल का अंतिम उपयोग कडाना बांध पर होता है। वर्ष 1984 से 2020 तक 37 वर्ष में कडाना बांध से मानसून के दौरान ओवरफ्लो जल के आंकलन के अनुसार औसतन 91.60 टीएमसी पानी बहकर समुद्र में चला जाता है। इस पानी से जालोर, सांचौर व बाड़मेर जिले का बड़ा हिस्सा लाभान्वित हो सकता है। कडाणा बांध की सुजलाम सुफलाम परियोजना अंतर्गत लगभग 340 किमी कच्ची नहर का निर्माण किया गया है, जसकी क्षमता लगभग 2000 क्यूसेक है। यह राजस्थान सीमा से 20 किमी पहले तक निर्मित है।- सुजलाम सुफलाम परियोजना अंतर्गत नहर की क्षमता 7000 क्यूसेक तक बढ़ाकर तथा लंबाई 370 किमी तक बढ़ाकर पानी जालोर, सांचौर जिलों के पास संग्रहित किया जा सकता है।

यह प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा चुका

विभागीय स्तर पर मुख्य अभियंता जयपुर को प्रोजेक्ट के संबंध में पूर्व में एक प्रपोजल भेजा गया है। जिसके अनुसार पानी प्रस्तावित यह व्यवस्था हो सकती है।- 25 टीएमसी कुल ओवरफ्लो पानी- 2 टीएमसी पेयजल स्कीम के लिए- 5 टीएमसी सीपेज व अन्य छीजत- 15 टीएससी सिंचाई के लिए