
इंग्लैंड में भी पनप रही है डोगरा संस्कृति
जम्मू(योगेश) अपनी मातृभूमि से दूर, इंग्लैंड में रहने वाले डोगरा समुदाय ( Dogra Community in London) के लोग अपने बच्चो को पढ़ाने से साथ साथ अपनी सांस्कृतिक ( Children teaching Culture ) और संस्कारों से भी अवगत करवाते है। यह सुनिश्चित करने के लिए यूरोप में सांस्कृतिक कार्यक्रम ( Culture Programme For Next genreation ) किये जाते है ताकि आनेवाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़े रहें।
लंदन में लोहड़ी त्योहार
ऐसे ही एक कार्यकर्म लोहड़ी के त्योहार पर मनाया गया, जम्मू क्षेत्र और उत्तर भारत में सर्दियों के अंत को चिह्नित करते हुए लोहड़ी को लंदन में रहने वाले डोगरों ने बच्चों को सदियों पुरानी परंपराओं और जातीय पहचान के बारे में जानकारी देने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस तरह के आयोजन डोगरा संस्कृति के जुड़ाव के प्रति गंभीरता को दर्शाते हैं।
बच्चे सीखते हैं संस्कृति
बच्चों को विशेष रूप से "सज्जा" बनाने के लिए कहा जाता है, जो रंगीन कागज से बनी पतंग होती है, जिसके इर्द-गिर्द युवा लड़के लोहड़ी के पारंपरिक गीत गाते हैं।"लंदन निवासी और में रहते हैं और वॉयस ऑफ़ डोगरा के संस्थापक मनु खजूरिया कहते हैं कि संस्कृति को संरक्षित करना हमारी जिम्मेवारी है और यह नई पीढिय़ों तक तभी जाएगी जब घरों में इसका अभ्यास किया जाता हो । कार्यशाला आनंद और सामुदायिक सामंजस्य को पुनर्जीवित करने का एक विनम्र प्रयास था, जिसे लोहड़ी का त्योहार जम्मू क्षेत्र में लाया गया था, सांस्कृतिक उत्कृष्टता केंद्र के सहयोग से एक शिल्प कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।
पाक के खिलाफ मुखर डोगरा
"बच्चों को अपनी मातृभूमि (जम्मू क्षेत्र) में लोहड़ी और अन्य त्योहारों को मनाने के तरीके के बारे में जानने में मज़ा आया। उन्हें क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राष्ट्र निर्माण में अपने लोगों के योगदान के बारे में बताया गया। इस प्रयास के साथ-साथ इंग्लैंड और पश्चिमी यूरोप के अन्य देशों में पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी लॉबी के खिलाफ वॉयस ऑफ डोगरा मुखर हैं और जम्मू क्षेत्र के कथानक की ओर ध्यान दिलाकर भारत विरोधी प्रचार का प्रभावी ढंग से सामना कर रहे हैं।
Published on:
09 Jan 2020 08:52 pm
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