18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जम्मू-कश्मीर: नेटबंदी से हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर पड़ा असर, निर्यात में देखी गई गिरावट

सहायक निदेशक हस्तशिल्प विभाग कश्मीर मुश्ताक अहमद शाह ने कहा कि इंटरनेट की कमी से...

less than 1 minute read
Google source verification
जम्मू-कश्मीर: नेटबंदी से हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर पड़ा असर, निर्यात में देखी गई गिरावट

जम्मू-कश्मीर: नेटबंदी से हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर पड़ा असर, निर्यात में देखी गई गिरावट

श्रीनगर: इंटरनेट सेवाओं की अनुपलब्धता का जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) क्षेत्र पर भारी असर पड़ रहा है। जम्मू कश्मीर में तैयार होने वाले हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात में साल की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।


आंकड़ों के अनुसार, पहली तिमाही- अप्रैल, मई और जून में दुनिया के बाकी हिस्सों में 298.28 करोड़ रुपए के कालीन, शॉल और अन्य हैंडीक्राफ्ट से जुड़े उत्पाद जम्मू कश्मीर से निर्यात किए गए थे।


दूसरी तिमाही में जुलाई, अगस्त और सितंबर शामिल हैं। इस दौरान 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को बेअसर किए जाने के बाद से एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से निर्यात में 187.47 करोड़ रुपए तक की गिरावट देखी गई।


आंकड़ों के अनुसार, कारपेट, जिसे पहली तिमाही में 122.65 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था, दूसरी तिमाही में घटकर 76.26 करोड़ रुपए रह गया।


पश्मीना और अन्य सामग्री से बने शॉल का निर्यात पहली तिमाही में 88.70 करोड़ रुपए से घटकर दूसरी तिमाही में 57.23 रुपए रहा। पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही की तुलना में, इस वर्ष दूसरी तिमाही में हस्तशिल्प के निर्यात में 48.99 करोड़ रुपए तक की गिरावट देखी गई है। पिछले साल राज्य से 917.66 करोड़ रुपए के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात हुआ। इंटरनेट की अनुपलब्धता से रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

सहायक निदेशक हस्तशिल्प विभाग कश्मीर मुश्ताक अहमद शाह ने कहा कि इंटरनेट की कमी से जम्मू-कश्मीर आधारित डीलरों द्धारा ऑर्डर की डिलीवरी प्रभावित हुई है। शाह ने दावा किया कि इस साल उत्पादन में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "इस साल का उत्पादन अच्छा है क्योंकि कश्मीर के कुटीर क्षेत्र में केवल घर के अंदर इकाइयों का समावेश है।