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डल झील खो रही अपना आकर्षण, करोड़ों खर्च करने के बाद भी हालात बदतर

Jammu and Kashmir News: स्थानीय निवासी बशीर अहमद वानी आज भी उस समय को याद करते हैं जब लोग (Srinagar Dal Lake) डल (Kashmir Dal Lake) झील (Jammu and Kashmir Tourism) के (Kashmir Tourist Places) पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। उनका कहना है कि...

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डल झील खो रही अपना आकर्षण, करोड़ों खर्च करने के बाद भी हालात बदतर

डल झील खो रही अपना आकर्षण, करोड़ों खर्च करने के बाद भी हालात बदतर

(श्रीनगर,फिरदौस): अपनी रंगीन शिकारा और बर्फ से ढक़े पहाड़ों के मनोरम दृश्य से दुनिया भर को आकर्षित करने वाली श्रीनगर की डल झील (Srinagar Dal Lake ) धीरे-धीरे अपनी शान खो रही है। 2002 के बाद से जम्मू—कश्मीर सरकार ने झील के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर 850 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए है लेकिन जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है।

इन परियोजनाओं के तहत किया गया काम...

एक बड़ी परियोजना के तहत 2005 में राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था, जिसकी लागत 300 करोड़ रुपए थी। 2010 में प्रधान मंत्री पुनर्निर्माण कार्यक्रम शुरू किया गया जिसकी लागत 350 करोड़ रुपए थी। डल और निगीन झील से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए तीसरी परियोजना पर काम किया गया लेकिन हालात सुधरते दिखाई नहीं दिए।


प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता...

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, डल झील में सीवरेज का पानी आने और आस—पास रहने वालों के कचरा फेंकने के कारण पानी की गुणवत्ता बिगड़ गई है। पर्यावरणविद डॉ. शकील अहमद रोशशू द्धारा किए गए अध्ययन से पता चलता है कि झील का 32 प्रतिशत हिस्सा गंभीर तो 48 फीसदी हिस्सा मध्यम प्रदूषण के अंतर्गत आता है जबकि 20 प्रतिशत झील का पानी अपेक्षाकृत स्वच्छ है।


यह है विशेषज्ञों की राय...

विशेषज्ञों के अनुसार अनियोजित शहरीकरण, उच्च जनसंख्या वृद्धि, गहन कृषि की वजह से झील पर विपरित प्रभाव पड़े हैं। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने भी सरकार को अवगत कराया था कि डल पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।


क्या कहते है स्थानीय निवासी...

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड निदेशक रफी अहमद ने कहा कि वे झील की जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी कर रहे हैं। साथ ही बोर्ड ने सरकार को प्रदूषण के कारणों के बारे में बताया है। स्थानीय निवासी बशीर अहमद वानी आज भी उस समय को याद करते हैं जब लोग डल झील के पानी को पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। उनका कहना है कि झील शहरीकरण और अतिक्रमण के कारण खराब हो गई है।


कर रहे है हर संभव प्रयास...

झील और जल विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन जीएम डार ने कहा कि सरकार डल झील के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए प्रयासरत है। बहुत बदलाव नहीं हो सकता है लेकिन हर संभव प्रयास किया जा रहा है।