13 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महबूबा मुफ्ती ने की पीएम मोदी से इमरान की पहल का सकारात्‍मक जवाब देने की अपील

पीडीपी प्रमुख ने कहा तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था और सीमा पर संघर्ष विराम भी हुआ था...

2 min read
Google source verification
mehboba mufti file photo

mehboba mufti file photo

(पत्रिका ब्यूरो,जम्मू): पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान के संभावित प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान के दोस्ती के प्रस्ताव को स्वीकार करने की अपील की है। महबूबा ने पार्टी के 19वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित रैली में कहा कि पाकिस्तान में नई सरकार बनेगी और नया प्रधानमंत्री होगा, जिसने भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। इमरान ने वार्ता की बात कही है। मोदी को इस पर सकारात्मक जवाब देना चाहिए।

उस पीएम का नाम लिखा जाएगा स्वर्णीम अक्षरों में जो...

पीडीपी प्रमुख ने कहा कि आगामी चुनाव पाकिस्तान के साथ मेल-मिलाप की प्रक्रिया शुरू करने में बाधा नहीं बनना चाहिए। चुनाव तो आते-जाते रहते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था और सीमा पर संघर्ष विराम भी हुआ था। यह राजनेता जैसे गुण हैं। ऐसे नेता चुनावों के बारे में नहीं बल्कि लोगों के बारे में सोचते हैं। जम्मू-कश्मीर हमारे देश के प्रधानमंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पीडीपी प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा सुलझाने और राज्य में खूनखराबा खत्म करने वाले प्रधानमंत्री का नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

दबाव में किया गठबंधन के दौरान काम

महबूबा ने पिछले महीने गठबंधन सहयोगी भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद मुख्‍यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 20 जून से राज्य में राज्यपाल शासन लागू है। भाजपा के साथ गठबंधन पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह जहर का घूंट पीने के बराबर था। महबूबा ने कहा कि 2 साल के कार्यकाल में उन्होंने बेहद दबाव में काम किया, लेकिन इन सब के बीच सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की।

हुर्रियत से बात करे केंद्र सरकार-महबूबा

महबूबा ने एक बार फिर केंद्र सरकार से अपील की कि हुर्रियत से बातचीत के लिए अपनी ओर से पहल करे। महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बातचीत के दौरान केंद्र को हुर्रियत के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हुए उन्हें भी बातचीत की मेज पर साथ लाना होगा। महबूबा ने कहा कि उन्होंने रमजान के दौरान जम्मू कश्मीर में सीजफायर का फैसला कर सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की थी और केंद्र को भी इस दिशा में काम करना चाहिए।