
जिंदगी में बदलाव ला रहा प्रतिबंध, टीवी-मोबाइल छोड़ लोग तलाश रहे संबंध
श्रीनगर. कहते हैं कि हर बात के दो पहलू होते हैं। यह नजरिए पर निर्भर है कि हम उस बात को सकारात्मक लेते हैं या नकारात्मक। कश्मीर ( Jammu Kashmir ) में अनुच्छेद 370 ( Article 370 ) को निष्प्रभावी करने के बाद इंटरनेट, मोबाइल फोन आदि पर लगे प्रतिबंधों ने जहां एक ओर लोगों को परेशान किया वहीं इसका एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। 19 साल का आसिफ अहमद, जो नई दिल्ली स्थित कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रहा है, को पबजी जैसे इंटरनेट गेम्स की लत लग गई थी। जिसे वह अपने माता-पिता की कोशिशों के बावजूद छोड़ नहीं पा रहा था। श्रीनगर के पुराने शहर निवासी आसिफ माता-पिता के लाख समझाने पर भी दिनभर घर में रह कर मोबाइल पर गेम खेलता रहता था। लेकिन अब यहां इंटरनेट पर पाबंदी ने आसिफ जैसे सैकड़ों युवाओं की दिनचर्या को बदल कर रख दिया है। अब यहां के युवा मोबाइल फोन और टीवी छोड़ मछली पकडऩे और अन्य खेल खेलने में समय बिता रहे हैं।
बाहर निकले लोग तो हुआ मेल-मिलाप
आसिफ की तरह, कश्मीर में अधिकतर लोग संचार नाकाबंदी और प्रतिबंधों के मद्देनजर पिछले दो सप्ताह से अपने घरों में बैठे हैं। घर बैठे लोगों ने अब बाहर निकल एक-दूसरे से मिलना-जुलना शुरू कर दिया है। अब लोगों को मछली पकड़ते, इनडोर खेल खेलते हुए या फिर साथ मिलकर फिल्में देखते हुए देखा जाता है।
माता-पिता बच्चों को दे रहे धैर्य की सीख
बेमिना निवासी मोहम्मद शफी अपने 12 साल के बेटे को मछली पकडऩा सिखाने ले जाते हैं। शफी ने कहा कि उनका बेटा अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से सोशल मीडिया और मोबाइल फोन पर बात किए बिना चिंतित था। अब वे उसे मछली पकडऩे के लिए ले जा रहे हैं। शफी का मानना है कि मछली पकडऩा धैर्य सिखाता है और मन को भी सुकून देता है।
सामूहिक खेलों का सहारा
श्रीनगर के जक़ूरा निवासी आशिक हुसैन प्रतिबंधों के चलते घर की चारदीवारी में कैद थे। कपड़े की दुकान चलाने वाले उनके पिता अब्दुल रहीम ने कहा कि बच्चों की परेशानी देख मैं अब एक रिश्तेदार से एक कैरम बोर्ड लाया हूं। अब वे अपने बेटे और भतीजों के साथ खेलते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां एक या दो-चार परिवारों ने मिल कर सामूहिक खेल से वक्त बिताना शुरू कर दिया है।
Published on:
28 Aug 2019 10:38 pm
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