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नई किताब ‘राजनीतिक घेराव’ से फिर सुर्खियों में जमशेदपुर के युवा लेखक अंशुमन भगत, जानिए क्या है खास

झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले युवा लेखक अंशुमन भगत अपनी नई किताब से फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने 'राजनीतिक घेराव' नामक नई किताब लिखी है। जो पाठकों में काफी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस कितबा में अंशुमन ने भारतीय राजनीति के कई पहलुओं पर कलम चलाई है।

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Jamshedpur Famous writer Ansuman Bhagat's New Book Rajnitik Gherab

कहते हैं कलम की धार से लेखक नहीं, लेखक के विचार से कलम की धार चलती है। झारखंड के जमशेदपुर के रहने वाले युवा लेखक अंशुमन भगत के बारे में भी उक्ति सटीक नजर आती है। हाल ही में अंशुमन ने 'राजनीतिक घेराव' नामक नई किताब लिखी है। जिसे पाठकों का खूब प्यार मिल रहा है। यह पुस्तक अपने प्रकाशन के कुछ दिनों में ही नंबर वन बेस्ट सेलिंग किताबों की श्रेणी आ गई थी। जिसपर पाठक अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। झारखंड के जमशेदपुर शहर के प्रसिद्ध लेखक अंशुमन भगत और सह लेखक बालाजी मिश्रा की लिखी गई यह पुस्तक राजनीतिक के हर पहलुओं को बड़ी बारीकी से दिखाता है। इस पुस्तक को पाठकों द्वारा काफी स्नेह मिला, वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे अन्य पाठक हैं जिन्हें इस पुस्तक में कमियां दिखाई दी और उन्होंने अपने विचारों से अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार यह पुस्तक किसी एक पक्ष का ही समर्थन करता है। और यह हमेशा होता है कि अगर हम आज गलती सुधारते नहीं है तो उस गलती का एहसास हमें इतिहास द्वारा ही पता चलती है।

लेखकों का यही प्रयास है कि हर इंसान यह समझ सके कि हमारे आसपास जो गलतियां हो रही है उसे हम किस तरह सही कर सकते हैं ताकि आने वाले समय में हमें कोई भी परेशानी ना हो। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि लेखक अपने विचार पाठकों पर लाधना चाहता है, लेकिन इसके पीछे कुछ और ही है। लेखक कभी अपने विचारों को लोगों पर नहीं थोपता बल्कि लेखक तो अपने विचारों के साथ हमेशा खड़ा रहता है और पाठकों तक अपने विचार पहुंचाता है।

अब यह पाठकों पर निर्भर करता है कि वह उसे किस दिशा की ओर ले, इस पुस्तक में लिखे विचार किसी का समर्थन नहीं करते, बल्कि सामाजिक विचारों को तथ्य के आधार पर इस पुस्तक को लिखा गया है। इस पुस्तक की खास बात यही है कि इस पुस्तक में विचारों की स्वतंत्रता है। लोकतंत्र की झलक है, शब्दों में कड़वाहट जरूर हो सकते हैं किंतु सत्य को कोई असत्य नहीं बता सकता। वह जीवन भर सत्य ही रहेगा।


इस पुस्तक में क्या सही है और क्या गलत इसे ही बताया गया है और उसके पीछे की वास्तविकता को बड़ी बारीकी से लेखक ने दर्शाया है। इस पुस्तक का लिखने का एकमात्र उद्देश्य केवल और केवल लोगों को राजनीति के विषय पर जागरूक करना है, जिससे समाज में चल रहे सही और गलत को हर इंसान समझ सके क्योंकि राजनीति यह सभी के जीवन में अपना असर डालता है और लोग सही मायनो में राजनीति से जुड़े रहते हैं।