ABEO death: एबीईओ के साथ ही शहर के टॉप कोचिंग (Coaching) के थे संचालक, 100 से अधिक छात्र-छात्राएं उनके कोचिंग में पीएससी समेत अन्य परीक्षाओं की कर रहे थे तैयारी, अभ्यर्थियों (Candidates) की नौकरी लगाने जिस अफसर को दिए थे रुपए वह हो गया है फरार, पैतृक संपत्ति बेचकर लौटा रहे थे रुपए
जांजगीर-चांपा. ABEO death: नवागढ़ एबीईओ राजीव नयन शर्मा का रविवार की सुबह बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में हृदयाघात से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बिलासपुर में ही किया गया। बताया जा रहा है कि शर्मा की तबीयत बीते तीन-चार दिनों से कुछ ज्यादा ही खराब थी। वे डिप्रेशन के शिकार थे, जिसके चलते उन्हें अटैक आ गया। अस्पताल में इलाज के दौरान भी डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके। एबीईओ (ABEO) का शहर में कोचिंग संस्थान भी है। यहां युवा पीएससी (PSC) समेत अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। यह बात भी सामने आ रही है कि 6 माह पूर्व दर्जनों अभ्यर्थियों से नौकरी लगाने के नाम पर उन्होंने डेढ़ करोड़ से भी अधिक रुपए लिए थे लेकिन नौकरी नहीं लगी। वे पैतृक संपत्ति बेचकर रुपए लौटा रहे थे।
बीडीएम उपनगर जांजगीर के रहने वाले नवागढ़ में एबीईओ के रूप में पदस्थ राजीव नयन शर्मा शहर में कोचिंग क्लासेस संचालित कर रहे थे। उनकी कोचिंग सेंटर में कई बैच में सैकड़ों छात्र पीएससी व अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उनके कोचिंग सेंटर निकले छात्रों की अच्छे पदों पर नौकरी भी लगी, लेकिन अचानक पासा पलटा और उनका बुरा दौर शुरू हो गया। जिसके चलते वे डिप्रेशन के शिकार हो गए।
उनकी तबीयत दिन-ब-दिन खराब होते गई। तीन-चार दिन पहले जब उनकी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब होने लगी तो उन्हें बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन रविवार की सुबह उन्हें अचानक अटैक आया और उनका निधन हो गया। उनके निधन होने पर शहर में शोक की लहर है।
इस वजह से थे परेशान
शहर में चर्चा का विषय है कि छह माह पहले राज्य शासन से बड़ी तादात में विभिन्न पदों में भर्ती के लिए वेकैंसी निकली थी। जिसमें उन्होंने 40-50 अभ्यर्थियों से नौकरी लगाने के नाम पर लाखों रुपए लिए थे, लेकिन अभ्यर्थियों की नौकरी (Job) नहीं लगी। राजधानी के जिस अफसर को उन्होंने नौकरी लगाने के नाम पर पैसे दिए थे वह फरार हो गया।
ऐसे में जिले के अभ्यर्थियों द्वारा पैसों की वापसी के लिए एबीईओ शर्मा पर दबाव (Pressure) बनाया जा रहा था। पैसों की वापसी के लिए उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति को बेचना शुरू कर दिया था ताकि अभ्यर्थियों के पैसे वापस हो जाए। इस बीच उनकी तबीयत खराब हो गई और उनका निधन हो गया।